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एकात्म दर्शन

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राजस्थान में जब किसान हल जोतता है तो स्यावड़ माता का स्मरण करते हुए एक पद गाते है। इसी पद में हमारा एकात्म मानव दर्शन आ जाता है। इस भाव के जागरण के साथ ही व्यक्ति का अहम स्वयम् से उठकर परिवार,परिवार से समाज,समाज से राष्ट्र और उससे भी व्रहत होकर पूरी सृष्टि तक व्याप्त हो जाता है। स्यावड़     माता     सतकारी दाना-फाका     भोत।    करी बैण-सुभासणी रै भाग रो देई चीड़ी-कमेडी  रै  भाग रो देई ध्याणी   अर  जवाई  रो  देई घर आयो साधू  भूखो न जा बामण    दादो    धप'र   खा सुन्ना    डांगर    खा    धापै चोर-चकोर    लेज्या    आपै करुंआ    रै    भेले   ने   देई सुणीजै       माता        सूरी छत्तीस        कौमां...

108 ही क्यों???

108 की संख्या का महत्व ही क्यों जब हम माला करते है तो मन में अक्सर ये प्रश्न आता है कि माला में १०८ मनके ही क्यों होते है.इससे कम या ज्यादा क्यों नहीं ? हमारे धर्म में 108 की संख्या मह...

नव वर्ष संवत 2072

आने वाली चैत्रीय वर्ष प्रतिपदा हेतु स्वरचित :- बीत गया जो,बीत गया ! रात गई,बात गई ! बहुत कुछ अनचाहा हो गया... बहुत कुछ अनकिया रह गया ! चलो फिर से एक नई शुरूआत करें ! आने वाला है नव वर्ष ...