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स्वयंसेवको का परिवार भाव ही संघ की अनन्त शक्ति

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संघ की अपनी विशिष्ट कार्य पद्धति है, जो सतत 95 वर्ष से विकसित होती गई है। बहुत वरिष्ठ स्वयंसेवक कार्यकर्ता कभी कभी कहते है, संघ कार्य एक तरह से अनफोल्डिंग जैसा है, जो नित नूतन, चिर पुरातन जैसा है। इसमें चिर पुरातन जो है वह यह कि स्वयंसेवक के मन, मस्तिष्क आत्मा में राष्ट्र के प्रति अगाध श्रद्धा और दूसरे स्वयंसेवक के प्रति परिवार भाव। किंतु हाल ही में राहुल गांधी ने संघ परिवार शब्द को चर्चा में ला दिया है। वैसे तो आजकल राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से कोई समझदार व्यक्ति नहीं लेता है। लोग उनकी ऊल-जलूल बातों को गंभीरता से लेना स्वयं की तोहीन समझने लगे हैं। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो राहुल गांधी की बातों को हल्के में लेने लगे हैं। आजकल वे ट्विटर पर ट्वीट बम जैसा कुछ कुछ करने की जुगत में भी लगे हुए दिखाई देते हैं। उनके ट्वीट को ट्वीट बम कहना भी बम की तोहीन होगी। जब पालघर में दो साधुओं की पीट-पीट कर हत्या की जाती है, तो वे चुप रहते हैं। लेकिन जब किसी आसिफ को दो थप्पड़ पड़ जाते हैं तो ये उसे कई गुना बड़ा मुद्दा बना देते हैं। पादरियों पर लगे बलात्कार के असंख्य आरोपों पर वे शांत रह...

विजयादशमी पर विशेष: सांस्कृतिक राष्ट्रभाव की ओर बढ़ता भारत का मूल समाज

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जड़ों की तरफ बढ़ते कदम- वर्तमान में भारत अपनी जड़ों की तरफ कदम बढ़ा चुका है। भारत अपने उस अतीत की ओर जो गौरवशाली है, उस अतीत की ओर जो वैभवशाली है लौट रहा है। आज उन करोड़ों भारतीयों का जीवन उद्देश्य साकार रूप ले रहा है, जो परतंत्रता के काल में सैकड़ों वर्षो के दौरान इस वैभवशाली स्थिति को प्राप्त करने के लिए संघर्षरत रहे है। भारत आज पुनः भारतवर्ष बनने की ओर कदम बढ़ा चुका है। भारत की सर्वांगीण सुरक्षा, स्वतंत्रता और विकास के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास प्रारंभ हो रहे हैं। वास्तव में इस सबके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1925 से अविरत कार्यरत है। इस दिशा में अपनी स्थापना दिवस विजयादशमी के अवसर पर संघ प्रतिवर्ष एक कदम और आगे बढ़ जाता है। संघ राष्ट्र जागरण का एक मौन सशक्त आंदोलन बन चुका है। संघ स्वयंसेवकों का प्रखर राष्ट्रवाद आज भारत के कोने कोने में देश प्रेम, समाजसेवा, हिंदू जागरण और राष्ट्रीय चेतना की अलख जगा रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले विशाल हिंदू समाज के प्रत्येक पंथ, जाति, वर्ग के अनुयायियों की सम्मिलित विजयशालिनी शक्ति के आज जो दर्शन हो रहे हैं, उसके पीछे संघ का ही अथक, अविरत पर...

आरएसएस में ऐसा क्या है जो नौजवानों को आकर्षित करता है।

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किसी ने पूछा-  आरएसएस से जुड़ने से मुझे क्या फायदा और नुकसान होगा? तो जानिए- समकालीन भारत में राजनीतिक बदलाव के पीछे हिन्दुत्व की विचारधारा और उसके वाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्विवादित रूप से केन्द्रीय भूमिका है। यह बदलाव असाधारण है। इसने न सिर्फ स्थापित राजनीति को निष्प्रभावी किया बल्कि वैकल्पिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोणों को बढ़ती हुई स्वीकृति के साथ स्थापित करने का काम किया है। भारत में वैचारिक संघर्ष और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है। जिन्हें यह परिवर्तन अचानक और अप्रत्याशित लगता है वे सम्भवतः देश के भीतर दशकों से हो रहे ज़मीनी स्तर के बदलाव को न समझ पाए हैं और न ही आज भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। संघ के प्रभाव के पीछे बीस के दशक से ही पीढ़ी दर पीढ़ी युवाओं का आकर्षण रहा है। आज इसे भारत के युवाओं का भारी समर्थन मिला हुआ है। स्वभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि कथित रूप से प्रगतिशीलता, बदलाव और क्रांति की बात करने वाली विचारधाराएं हाशिए पर क्यों चली गईं ? स्वयंसेवकों के साथ समाज की सज्जन शक्ति को गतिविधियों में जोड़ें जिन्हें वे पश्चिम के बुद्धिजी...

राष्ट्र मंदिर के पुजारी सोहन सिंह

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"18 अक्तूबर/जन्म-दिवस" आरएसएस प्रचारक संघ कार्य के लिए जीवन समर्पित करने वाले वरिष्ठ प्रचारक श्री सोहन सिंह जी का जन्म 18 अक्तूबर, 1923 (आश्विन शुक्ल 9, वि.सं. 1980) को ग्राम हर्चना (जिला बुलंदशहर, उ.प्र.) में चैधरी रामसिंह जी के घर में हुआ था। छह भाई-बहिनों में वे सबसे छोटे थे। 16 वर्ष की अवस्था में वे स्वयंसेवक बने। 1942 में बी.एस-सी. करते ही उनका चयन भारतीय वायुसेना में हो गया; पर उन्होंने नौकरी की बजाय प्रचारक कार्य को स्वीकार किया। 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की विफलता से युवक बहुत उद्विग्न थे। उन दिनों सरसंघचालक श्री गुरुजी युवकों को देश के लिए समय देने का आग्रह कर रहे थे। उनकी प्रेरणा से दिल्ली के 80 युवक प्रचारक बने। उनमें सोहन सिंह जी भी थे। इससे पूर्व वे दिल्ली में सायं शाखाओं के मंडल कार्यवाह थे। 1943, 44 और 45 में उन्होंने तीनों संघ शिक्षा वर्ग पूरे किये। प्रचारक बनने पर उन पर क्रमशः करनाल, रोहतक, झज्जर और अम्बाला में तहसील; करनाल जिला, हरियाणा संभाग और दिल्ली महानगर का काम रहा। 1973 में उन्हें जयपुर विभाग का काम देकर राजस्थान भेजा गया। आपातकाल में वे वहीं गिरफ्...

प्रकृति को नष्ट कर व्यक्तिगत लाभ हमारा दर्शन नही है: डॉ भागवत

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डॉ भागवत कार्यक्रम के दौरान कोटा, 6 अक्टूबर। हमें संपूर्ण ब्रह्मांड का पोषण करने वाला कृषि का आधार बनाना चाहिये। यही हमारी संस्कृति है। कृषि व्यापार करने का साधन मात्र नहीं है, हमने कृषि को वैभव की देवी लक्ष्मी की आराधना के रूप में देखा है। कृषि किसान का धर्म है, कृषि कर्म ही उसका धर्म है। यह केवल आजीविका का साधन नहीं है। कृषि समाज जीवन के लिए आवश्यक कार्य है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ मोहनराव भागवत ने मंगलवार को श्रीरामशांतिता सत्तार स्वामी विद्या निकेतन में बोलते हुए कही। वे भारतीय किसान संघ की ओर से आयोजित श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी वर्ष समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में गऊघाट आश्रम के संत निरंजननाथ अवधूत, राष्ट्रीय अध्यक्ष आईएन वस्वेगौड़ा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी, प्रदेश अध्यक्ष मनिलाल लबाना भी मंच पर मौजूद रहे। इससे पहले डाॅ भागवत ने भगवान बलराम, भारत माता, हल, गौ का पूजन और कृषि माडल का अवलोकन किया। डाॅ भागवत ने कहा कि कृषि उपज के मूल्य बढ़ाने के कई उपाय हैं, जो भारतीय पद्धति है उसे हमें अपनाना चाहिए। हम प्रकृति को...

स्वयंसेवकों के साथ समाज की सज्जन शक्ति को भी गतिविधियों में जोड़ें – डॉ. मोहन भागवत

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दो दिवसीय जयपुर प्रवास पर आए सरसंघचालक ने रविवार को दो सत्रों में गतिविधि प्रमुखों से संवाद किया। उन्होंने कोरोना महामारी की कठिन परिस्थितियों में गतिविधियों का काम कैसे चला, इसके अनुभव सुने तथा समाज के वंचित व अभावग्रस्त लोगों के लिए चलाए गए कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि किसी भी गतिविधि का काम समाज में नया नहीं है, अपनी रुचि-प्रकृति के अनुसार पहले से कुछ लोग कर रहे हैं। ऐसे लोगों, संस्थाओं को साथ लेकर इसमें तीव्रता लाने का व्यवस्थित प्रयत्न हम कर रहे हैं. इस सम्बन्ध में समाज में वातावरण बनाने की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया। गतिविधियों का काम समाजव्यापी है और उसका आचरण बदलने का काम है। इसकी पहल 15 लाख स्वयंसेवकों के परिवारों से होनी चाहिए, जिससे समाज का भाव शीघ्र बदलने लगेगा। सरसंघचालक ने हर स्वयंसेवक के घर में साप्ताहिक परिवार बैठक प्रारम्भ करने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि पिछले 6 माह में संघ से जुड़ने वालों की संख्या हर वर्ग में सर्वत्र बढ़ी है। ऐसे में नए लोगों को गतिविधियों के कार्य में जोड़कर स्वयंसेवक बनाएं। स्वयंसेवक गतिविधियों के माध्यम से भारत का सही व सत्य समाचार पह...

अजेय शक्ति का निर्माण: विचार नवनीत

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   हमारी सदा यही प्रार्थना रही है "सभी सुखी हो, सभी की सदा अनिष्ठ से मुक्ति हो" जबकि वर्तमान का पश्चिम " अधिकतम संख्या का अधिकतम हित" के आदर्श वाक्य से आगे नहीं बढ़ पाया है। हमारा उद्दात आदर्श रहा है, प्राणी मात्र का पूर्ण कल्याण, मातृभूमि, समाज एवं परंपराओं के प्रति श्रद्धा, जो कि राष्ट्र की कल्पना के अंतर्गत आती है जो व्यक्ति में वास्तविक सेवा और बलिदान की भावना को प्रेरित करती है।  राष्ट्रवाद नष्ट नहीं किया जा सकता है और ना ही उसे नष्ट करना चाहिए।   हिंदू समाज की अप्रतिम राष्ट्रीय प्रतिभा के अनुरूप उसे पुनः संगठित करने का पवित्र कर्तव्य जिसके द्वारा हम राष्ट्रों के मध्य सामंजस्य पूर्ण सहयोग चाहते हैं उसका विलोपन नहीं, तथा जिसको राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ग्रहण किया है न केवल भारत के ही सच्चे राष्ट्रीय पुनरुत्थान का एक कार्यक्रम मात्र है अपितु संसार की एकता एवं मानव कल्याण के स्वप्न को चरितार्थ करने की अनिवार्य पूर्व भूमिका है।  हमारे ऊपर हिंदू समाज को इसलिए स्वस्थ दशा में सुरक्षित रखने का पवित्र कर्तव्य है। भारत के बाहर के संसार ने आत्मा के शास्त्र का अध्ययन...

व्यक्ति निर्माण करता आरएसएस: एक शाश्वत सत्य।

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रेशिमबाग नागपुर, तृतीय वर्ष (विशेष) 2019 संघ शिक्षावर्ग अब पूर्ण वयस्कता को प्राप्त हो गया है। वर्ग स्थल एक तपोथली है। संघ के प्रारम्भिक वर्षो में सभी वर्ग (प्रशिक्षण) यहीं होते थे। यह वह तपोभूमि है जहां से शिक्षित होकर हजारों हजारों ध्येय समर्पित कार्यकर्ताओं ने अपना तन, मन, धन और संपूर्ण जीवन लगाकर संघ कार्य को संपूर्ण हिंदू राष्ट्र में पहुंचाया है। इस दृष्टि से इस भूमि के रजकणों का स्पर्श ही पवित्र करने वाला है। यहां रहकर शिक्षा वर्ग करना अपने पुण्य का उदय होने पर ही संभव है। यह तपोस्थली 7 एकड़ में फैली है। जो न केवल भारत बल्कि विश्व में कहीं भी रह रहे स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। पवित्र धाम है। इस भूमि के लगभग मध्य में निर्मित स्मृति मंदिर में विराजित डॉक्टर हेडगेवार जी का विग्रह सब ओर से दिखाई देता है। ऐसा लगता है कि डॉक्टर जी सतत देख रहे हैं। इस पूरे परिसर के किसी भी स्थान से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि डॉक्टर जी देख रहे हैं। प्रातः तीसरा पहर 3:30AM का समय कुछ शिक्षार्थी जाग गए। अपनी दैनिक क्रियाओं में लग गए इनकी हलचल से निरंतर कोई न कोई जाग रहा है। 4:15AM पर जा...

आरएसएस के बारे में भ्रम दूर करें, सरल सत्य पढ़ें

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जो लोग संघ   को नही जानते है वे समय-समय पर बुद्धि पिशाचों द्वारा रचे गए षड्यंत्र को सच मानकर भ्रमित हो जाते हैं। इसलिए आवश्यकता है कि आप और हम कुछ सामान्य बातों को, संघ पद्धति को, प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझ लें। वैसे तो संघ को समझना है, तो शाखा आना ही होगा फिर भी इस आलेख में अल्प प्रयास किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  आरएसएस ने अपने प्रारंभ में ही तय कर लिया था कि " संघ कुछ नहीं करेगा स्वयंसेवक कुछ ना छोड़ेगा।" संघ केवल व्यक्ति निर्माण करेगा। राष्ट्र के लिए जैसा चरित्र चाहिए वैसे व्यक्तियों के निर्माण की कार्यशाला, जिसे आप और हम शाखा नाम से जानते हैं, केवल उसी शाखा को चलाना संघ ने तय किया। जैसे-जैसे स्वयंसेवकों का निर्माण होता गया का निर्माण होता गया वैसे वैसे समाज के विभिन्न क्षेत्रों की ओर ध्यान गया। जिन जिन स्वयंसेवकों को जैसा जैसा समझ में आया और आवश्यकता लगी, उन उन क्षेत्रों में वैसा वैसा संगठन खड़ा होता गया। जैसे विश्व हिंदू परिषद, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम, सेवा भारती, संस्कार भारती, संस्कृत भारती, भारत सेवा परिषद आदि आदि। यह भी प...