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अफगानिस्तान: डूरंड रेखा, तालिबान, पश्तून और चाबहार पोर्ट से जुड़ी भारत की पूरी रणनीति

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अफगानिस्तान: डूरंड रेखा से चाबहार पोर्ट तक, भारत की रणनीति और एशिया का नया भू-राजनीतिक संघर्ष अफगानिस्तान: डूरंड रेखा, तालिबान, पश्तून और चाबहार पोर्ट से जुड़ी भारत की पूरी रणनीति- लेखन मनमोहन पुरोहित मनु महाराज  डूरंड रेखा क्या है? पश्तून कौन हैं? तालिबान कैसे उभरा? उत्तरी गठबंधन की भूमिका क्या रही? चाबहार पोर्ट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? जानिए अफगानिस्तान के इतिहास, भू-राजनीति और भारत की रणनीति का विस्तृत विश्लेषण। अफगानिस्तान: डूरंड रेखा से चाबहार पोर्ट तक, भारत की रणनीति और एशिया का नया भू-राजनीतिक संघर्ष प्रस्तावना: क्यों फिर दुनिया की नजर अफगानिस्तान पर है? अफगानिस्तान को यूँ ही "साम्राज्यों का कब्रिस्तान" नहीं कहा जाता। सिकंदर महान से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य, सोवियत संघ और अमेरिका तक, हर महाशक्ति ने यहाँ अपने प्रभाव का विस्तार करने का प्रयास किया, लेकिन अंततः उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। आज भी अफगानिस्तान केवल एक देश नहीं, बल्कि एशिया की भू-राजनीतिक शतरंज का सबसे महत्वपूर्ण मोहरा है। इसकी अस्थिरता भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान और अमेरिका जैसे देशों की रणनीतियों को...