1857 की क्रांति: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और इसकी सुनियोजित संरचना
1857 की क्रांति: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और इसकी सुनियोजित संरचना 1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास की कोई आकस्मिक घटना या केवल सैनिकों का 'ग़दर' नहीं था, बल्कि यह औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों का एक सुनियोजित और संगठित शंखनाद था। वी.डी. सावरकर ने इसे 'भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' कहकर इसके वास्तविक स्वरूप को परिभाषित किया। यद्यपि ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे 'सैनिक विद्रोह' तक सीमित करने की कोशिश की, किंतु सूक्ष्म विश्लेषण यह सिद्ध करता है कि इसके पीछे गहरी योजना, कुशल कूटनीति और एक व्यापक लक्ष्य था। 1. क्रांति की पृष्ठभूमि और वैचारिक आधार 1857 की क्रांति रातों-रात पैदा नहीं हुई थी। इसके पीछे 100 वर्षों का ब्रिटिश शोषण, डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse), और भारतीयों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ जिम्मेदार था। राजनीतिक चेतना: नाना साहेब, लक्ष्मीबाई, और कुंवर सिंह जैसे नेताओं के बीच गुप्त पत्राचार इस बात का प्रमाण है कि वे एक साझा शत्रु के विरुद्ध एकजुट हो रहे थे। प्रतीकों का उपयोग: ...