25 जून 1975 : वह रात जब भारत में लोकतंत्र पर ग्रहण लगा
25 जून 1975 : वह रात जब भारत में लोकतंत्र पर ग्रहण लगा श्रृंखला : लोकतंत्र पर ग्रहण — आपातकाल की अनकही गाथा (भाग-1) 25 जून 1975 की वह रात्रि भारत के इतिहास की सबसे लंबी रातों में से एक थी। उस रात न कोई विदेशी आक्रमण हुआ था। न सीमाओं पर युद्ध छिड़ा था। न किसी प्राकृतिक आपदा ने देश को झकझोर दिया था। फिर भी अगले कुछ घंटों में करोड़ों भारतीयों की स्वतंत्रता, संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था एक ऐसे अंधकार में प्रवेश करने वाली थी, जिसकी कल्पना भी स्वतंत्र भारत ने कभी नहीं की थी। सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था। लोग अपने घरों में थे। समाचारपत्र अगले दिन के संस्करण तैयार कर रहे थे। विपक्षी नेता आगामी कार्यक्रमों की योजना बना रहे थे। किन्तु सत्ता के गलियारों में कुछ और ही चल रहा था। एक ऐसा निर्णय लिया जा चुका था, जो आने वाले इक्कीस महीनों तक भारत की आत्मा को झकझोरने वाला था। प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र को ही बंदी बनाने की नौबत आ गई? इलाहाबाद से उठी वह चिनगारी जिसने दिल्ली की सत्ता को विचलित कर दिया कहानी का आरम्भ 25 जून से नहीं, बल्...