1 मई या विश्वकर्मा जयंती: भारतीय श्रमिक चेतना का असली आधार क्या है?
1 मई या विश्वकर्मा जयंती: भारतीय श्रमिक चेतना का असली आधार क्या है? भारतीय श्रमिक आंदोलन के इतिहास में अक्सर यह सवाल उठता है कि दुनिया जब 1 मई को 'मई दिवस' मनाती है, तो भारतीय मजदूर संघ (BMS) जैसे संगठन इसे नकार कर विश्वकर्मा जयंती को राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में क्यों प्रतिष्ठित करते हैं? यह केवल तारीख का बदलाव नहीं, बल्कि दो अलग-अलग विचारधाराओं और संस्कृतियों का संघर्ष है। शिकागो की घटना: संघर्ष या विफलता? मई दिवस का इतिहास 1886 के शिकागो (अमेरिका) के 'हेमार्केट स्क्वायर' की घटना से जुड़ा है। अक्सर इसे श्रमिकों की जीत बताया जाता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह आंदोलन अपनी गलत रणनीतियों और हिंसा के कारण विफल रहा था। जिस 8 घंटे के कार्य समय की मांग के लिए यह हुआ, उसे अमेरिकी सरकार ने बहुत पहले (1868 में) ही सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया था। 1 मई को हुई हड़ताल तो शांतिपूर्ण थी, लेकिन 3 और 4 मई को हुई हिंसा ने पूरे अमेरिकी श्रमिक आंदोलन को वर्षों पीछे धकेल दिया। दिलचस्प बात यह है कि आज स्वयं अमेरिका मई दिवस को श्रमिक दिवस के रूप में नहीं मनाता। वहां सित...