आत्मनिर्भर भारत और युवा शक्ति: विकसित भारत 2047 का रोडमैप
आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास तक: विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका ✍️ मनमोहन पुरोहित 'मनु महाराज' भारत इस समय इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ अवसर भी असाधारण हैं और अपेक्षाएँ भी। एक ओर विश्व व्यवस्था तीव्र गति से बदल रही है, दूसरी ओर भारत अपनी जनसंख्या, प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक सामर्थ्य के बल पर एक नए युग की ओर बढ़ रहा है। यह केवल आर्थिक विकास की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास से भरे एक राष्ट्र के पुनर्जागरण की यात्रा है। इसी संदर्भ में पद्मभूषण कुमार मंगलम बिड़ला का यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि "आत्मनिर्भरता एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण है।" वास्तव में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल अपने देश में वस्तुओं का निर्माण करना नहीं है। आत्मनिर्भरता एक मानसिकता है, एक राष्ट्रीय स्वभाव है और एक ऐसा आत्मविश्वास है जो किसी राष्ट्र को पराधीनता की मनोवृत्ति से मुक्त करता है। विकसित भारत का स्वप्न तभी साकार होगा जब भारत का युवा आत्मनिर्भरता को केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व के रूप में स्वीकार करेगा।...