श्री गुरु नानकदेव जी की वाणी में मुस्लिम शासन की विडंबनाएँ : जब राजा कसाई बन गए और धर्म पंख लगाकर उड़ गया
श्री गुरु नानकदेव जी की वाणी में मुस्लिम शासन की विडंबनाएँ : जब राजा कसाई बन गए और धर्म पंख लगाकर उड़ गया श्री गुरु नानकदेव जी ने अपनी वाणी में लोदी शासन, बाबर के आक्रमण, तत्कालीन राजनीतिक भ्रष्टाचार, धार्मिक पाखंड और महिलाओं पर हुए अत्याचारों का निर्भीक चित्रण किया। जानिए उनकी वाणी में सत्ता और समाज की पीड़ा का स्वर। संत की वाणी में अपने युग का सच भारत के संतों की परंपरा केवल आध्यात्मिक साधना और ईश्वर की आराधना तक सीमित नहीं रही है। इस परंपरा के संतों ने अपने समय के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन को भी गहराई से देखा, समझा और अपनी वाणी में अभिव्यक्त किया। उन्होंने अन्याय के सामने मौन रहने के बजाय सत्य का पक्ष लिया। श्री गुरु नानकदेव जी इसी परंपरा के ऐसे युगद्रष्टा संत थे, जिनकी वाणी में आध्यात्मिक अनुभूति के साथ-साथ तत्कालीन शासन व्यवस्था की विसंगतियों, धार्मिक आडंबरों और सामान्य जनता की पीड़ा का सजीव चित्रण मिलता है। पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी का भारत राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा था। दिल्ली सल्तनत के लोदी शासकों का शासन था। इसके बाद बाबर के आक्रमण ने उत्तर भारत की...