झालमुड़ी से मेलोडी का सफर: जब कूटनीति के 'पास्ता' में गिरा घरेलू राजनीति का 'राशन'!
झालमुड़ी से मेलोडी का सफर: जब कूटनीति के 'पास्ता' में गिरा घरेलू राजनीति का 'राशन'! - एक 'परम-पवित्र' और घोर-वैश्विक राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तावना: कूटनीति का 'कैरम बोर्ड' और सोशल मीडिया की 'गोटी' कहते हैं कि पुराने ज़माने में कूटनीति (Diplomacy) का मतलब होता था—दो देशों के गंभीर, थके हुए, सफेद बाल वाले बुजुर्ग नेता, जो बंद कमरों में बैठकर, मोटे-मोटे चश्मों के पीछे से फाइलों को घूरते थे। उन फाइलों में 'द्विपक्षीय व्यापार', 'सामरिक संतुलन' और 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' जैसे ऐसे भारी-भरकम शब्द होते थे जिन्हें सुनकर ही आम आदमी को गहरी और शांतिपूर्ण नींद आ जाए। उस दौर में कूटनीति का सबसे बड़ा रोमांच यह होता था कि संयुक्त बयान (Joint Statement) में पूर्णविराम कहां लगा और अल्पविराम कहां छूटा। लेकिन भाई साहब, युग बदल चुका है! यह २०२६ का भारत है। अब कूटनीति फाइलों की धूल से निकलकर इंस्टाग्राम की रील्स, एक्स (ट्विटर) के ट्रेंड्स और परफ़ेक्ट कैमरा एंगल के 'पोर्ट्रेट मोड' में शिफ्ट हो चुकी है। और इस नए युग के सबसे बड...