स्वामी विवेकानंद से मोहन भागवत तक: भारतीय आध्यात्मिक-विचार परंपरा की निरंतर यात्रा
स्वामी विवेकानंद से मोहन भागवत तक: भारतीय आध्यात्मिक-विचार परंपरा की निरंतर यात्रा शिकागो 1893 से न्यूयॉर्क 2026 तक—मंच बदले, समय बदला, पर विविधता में एकता, सह-अस्तित्व और विश्व-कल्याण की भारतीय दृष्टि आज भी संवाद के केंद्र में न्यूयॉर्क का मैडिसन स्क्वायर गार्डन केवल एक विशाल सभागार नहीं है। यह उन मंचों में से एक है जहाँ कही गई बात बहुत जल्दी स्थानीय दायरे से निकलकर वैश्विक विमर्श का हिस्सा बन जाती है। 29 अगस्त 2026 को जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने यहाँ ‘Universal Oneness Celebration’ को संबोधित किया, तो कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष केवल हजारों लोगों की उपस्थिति नहीं था। अधिक महत्वपूर्ण वह विचार था जिसे उन्होंने सामने रखा— विविधता के भीतर एकता की पहचान। उनका कहना था कि भारत का दायित्व समय-समय पर संसार को इस एकात्मता का अनुभव कराना है। विविधता उस एकता को तोड़ती नहीं, बल्कि उसे सजाती है। ( ThePrint ) इसी बिंदु से मन अनायास 1893 के शिकागो की ओर जाता है। वहाँ एक युवा संन्यासी स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद में भारत की ओर से ऐसी सभ्यता का परिचय दिया थ...