उद्यमशीलता का मूल्य: श्रम, पूंजी और वामपंथी भ्रम से परे मई दिवस पर विशेष
उद्यमशीलता का मूल्य: श्रम, पूंजी और वामपंथी भ्रम से परे प्रत्येक वर्ष एक मई को दुनिया भर में 'मजदूर दिवस' मनाया जाता है। यह दिन श्रमिकों के पसीने, उनके संघर्ष और अधिकारों को सम्मान देने का प्रतीक है। लेकिन हाल के दशकों में, इस दिन का उपयोग वास्तविक सम्मान से कहीं अधिक एक विशेष विचारधारा को थोपने के लिए किया जाने लगा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम 'लाभ', 'हानि' और 'उद्यम' के वास्तविक अर्थ को समझें और उस वामपंथी नैरेटिव का विश्लेषण करें जो श्रम और पूंजी के बीच एक कृत्रिम दीवार खड़ी करता है। क्या केवल श्रम ही लाभ का स्रोत है? वामपंथी विचारधारा का एक बुनियादी तर्क यह है कि सारा लाभ केवल श्रमिक की मेहनत से पैदा होता है, और उद्यमी उस लाभ का शोषण करता है। सुनने में यह बात आकर्षक लग सकती है, लेकिन आर्थिक धरातल पर यह तर्क पूरी तरह खरा नहीं उतरता। यदि मशीनों और श्रमिकों की मौजूदगी ही लाभ की गारंटी होती, तो दुनिया का कोई भी कारखाना कभी बंद नहीं होता। हम आए दिन देखते हैं कि बेहतरीन मशीनरी और कुशल श्रमिकों के बावजूद कई कंपनियां घाटे में जाकर बंद हो जा...