क्या दुनिया की समस्याओं का समाधान भारत के पास है?
भारतीय दर्शन बनाम आधुनिक वैश्विक दृष्टिकोण क्या दुनिया की समस्याओं का समाधान भारत के पास है? ✍️ मनमोहन पुरोहित 'मनु महाराज' "दुनिया को भारत की आवश्यकता है, क्योंकि सभी को साथ में जोड़कर विकास की कल्पना भारत ही कर सकता है।" — डॉ. मोहन भागवत इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में विश्व एक विचित्र द्वंद्व से गुजर रहा है। विज्ञान अपनी चरम ऊँचाइयों को छू रहा है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव क्षमता को चुनौती दे रही है, संचार के साधन पूरी दुनिया को एक गाँव में बदल चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मानवता पहले से अधिक असुरक्षित, विभाजित और चिंतित दिखाई देती है। युद्ध समाप्त नहीं हुए, बल्कि अधिक विनाशकारी हो गए हैं। आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन असमानता भी बढ़ी है। भौतिक समृद्धि बढ़ी है, लेकिन मानसिक शांति कम हुई है। ऐसे समय में एक प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है—क्या आधुनिक वैश्विक दृष्टिकोण में कोई मूलभूत कमी है? और यदि है, तो क्या भारत के पास कोई ऐसा वैकल्पिक दर्शन है जो मानवता को नई दिशा दे सके? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में इसी प्रश्न की ओ...