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जौहर को कायरता कहना कितना उचित?

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जौहर को कायरता कहना कितना उचित? इतिहास, स्त्री अस्मिता और उस दौर की कठोर सच्चाई किसी भी सभ्यता के इतिहास में कुछ ऐसे अध्याय होते हैं, जिन्हें पढ़ते समय केवल तथ्य नहीं, उस समय की मनःस्थिति को भी समझना पड़ता है। जौहर उन्हीं अध्यायों में से एक है। आज के समय में सामूहिक आत्मदाह की कल्पना ही मन को विचलित कर देती है। आधुनिक समाज में जीवन की रक्षा सर्वोच्च मूल्य है और आत्मदाह किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य समाधान नहीं माना जा सकता। लेकिन क्या इसी आधुनिक दृष्टि को लेकर हम मध्यकालीन युद्धों में हुए जौहर को सीधे “कायरता” कह सकते हैं? मेरा उत्तर है— नहीं। जौहर का समर्थन करना और जौहर को ऐतिहासिक संदर्भ में समझना, ये दोनों अलग बातें हैं। किसी त्रासद घटना को समझना उसका महिमामंडन करना नहीं होता। और इतिहास को समझने के लिए सबसे पहले हमें उस काल के युद्ध, पराजित समाज की स्थिति, महिलाओं की सुरक्षा, बंदी बनाए जाने की आशंका और उस समय के सम्मान-बोध को समझना होगा। जौहर आखिर था क्या? जौहर को सामान्यतः ऐसी युद्धकालीन परिस्थिति से जोड़ा जाता है, जब किसी किले की पराजय निश्चित हो जाती थी और महिलाओं को शत्रु द्...

आधुनिक वैश्विक संकट और भारत का ‘तीसरा मार्ग’: व्यक्ति, समाज और प्रकृति के संतुलन का शाश्वत दर्शन

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आधुनिक वैश्विक संकट और भारत का ‘तीसरा मार्ग’: व्यक्ति, समाज और प्रकृति के संतुलन का शाश्वत दर्शन आधुनिक वैश्विक संकटों के बीच मोहन भागवत ने टोरंटो में भारत के ‘तीसरे मार्ग’ की बात रखी। जानिए व्यक्ति, समाज, प्रकृति, धर्म, सेवा, पर्यावरण और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पर आधारित भारतीय दृष्टि दुनिया को क्या दिशा दे सकती है। क्या आधुनिक दुनिया को विकास के एक नए रास्ते की जरूरत है? मानव सभ्यता ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनकी कल्पना कुछ शताब्दियों पहले असंभव लगती थी। परमाणु ऊर्जा से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक, मनुष्य ने प्रकृति की शक्तियों को समझने और उन्हें अपने उपयोग में लाने की अद्भुत क्षमता विकसित की है। लेकिन इसी उपलब्धि के साथ एक बड़ा प्रश्न भी खड़ा हुआ है— क्या वैज्ञानिक प्रगति अपने आप मानव कल्याण की गारंटी दे सकती है? आज दुनिया के सामने युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की असमानता और व्यक्ति तथा समाज के बीच बढ़ता तनाव जैसे प्रश्न हैं। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कनाडा के टोर...