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आधुनिक वैश्विक संकट और भारत का ‘तीसरा मार्ग’: व्यक्ति, समाज और प्रकृति के संतुलन का शाश्वत दर्शन

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आधुनिक वैश्विक संकट और भारत का ‘तीसरा मार्ग’: व्यक्ति, समाज और प्रकृति के संतुलन का शाश्वत दर्शन आधुनिक वैश्विक संकटों के बीच मोहन भागवत ने टोरंटो में भारत के ‘तीसरे मार्ग’ की बात रखी। जानिए व्यक्ति, समाज, प्रकृति, धर्म, सेवा, पर्यावरण और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पर आधारित भारतीय दृष्टि दुनिया को क्या दिशा दे सकती है। क्या आधुनिक दुनिया को विकास के एक नए रास्ते की जरूरत है? मानव सभ्यता ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनकी कल्पना कुछ शताब्दियों पहले असंभव लगती थी। परमाणु ऊर्जा से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक, मनुष्य ने प्रकृति की शक्तियों को समझने और उन्हें अपने उपयोग में लाने की अद्भुत क्षमता विकसित की है। लेकिन इसी उपलब्धि के साथ एक बड़ा प्रश्न भी खड़ा हुआ है— क्या वैज्ञानिक प्रगति अपने आप मानव कल्याण की गारंटी दे सकती है? आज दुनिया के सामने युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की असमानता और व्यक्ति तथा समाज के बीच बढ़ता तनाव जैसे प्रश्न हैं। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कनाडा के टोर...