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संगम के जल पर भ्रम और वैज्ञानिक सच्चाई

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संगम के जल पर भ्रम और वैज्ञानिक सच्चाई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संगम के जल की गुणवत्ता पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंपी गई रिपोर्ट को आधार बनाकर कुछ संस्थानों और विपक्ष ने जनता में भ्रम फैलाने का प्रयास किया। उत्तर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में स्पष्ट रूप से कहा कि संगम का जल आचमन करने योग्य है। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 57 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं और किसी ने भी जलजनित बीमारियों से ग्रस्त होने की शिकायत नहीं की है। वैज्ञानिक प्रमाण और जल की शुद्धता भारत के शीर्ष वैज्ञानिक और दिवंगत मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सहयोगी वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर ने भ्रम फैलाने वालों को चुनौती दी है कि कोई भी विशेषज्ञ आकर हमारे सामने प्रयोगशाला में संगम जल की जांच करवा सकता है। उनके अनुसार, संगम का जल अल्कलाइन जल की तरह शुद्ध पाया गया है। उन्होंने स्वयं संगम नोज, अरैल सहित विभिन्न घाटों से जल के नमूने एकत्र कर सूक्ष्म परीक्षण किया और निष्कर्ष निकाला कि: जल म...

प्रयागराज महाकुंभ 2025: ‘एक थैला, एक थाली’ अभियान ने दिया हरित और स्वच्छ कुंभ का संदेश

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प्रयागराज महाकुंभ 2025: ‘एक थैला, एक थाली’ अभियान ने दिया हरित और स्वच्छ कुंभ का संदेश — विशेष रिपोर्ट प्रयागराज महाकुंभ 2025 का नजारा इस बार कुछ अलग था। हर ओर आस्था की लहरें थीं, लेकिन उनके साथ बहने वाले प्लास्टिक और डिस्पोजेबल कचरे की मात्रा नगण्य थी। यह बदलाव आया ‘एक थैला, एक थाली’ अभियान से, जिसने इस विशाल आयोजन को हरित और स्वच्छ बनाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने न केवल आध्यात्मिक आस्था और भव्यता की परंपरा को बनाए रखा, बल्कि इस बार एक अनोखी सामाजिक एवं पर्यावरणीय क्रांति का साक्षी भी बना। ‘एक थैला, एक थाली’ अभियान ने इसे विशुद्ध धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर पर्यावरणीय जागरूकता और सामाजिक सहभागिता का उत्सव बना दिया। स्वयंसेवी प्रयास से शून्य बजट पर असाधारण उपलब्धि समुदाय की भागीदारी और संगठनों के समर्पण से इस अभियान को बिना किसी सरकारी बजट के सफलतापूर्वक संचालित किया गया। 43 राज्यों में फैले 7,258 संग्रहण केंद्रों के माध्यम से 2,241 संगठनों ने इस अभियान को मजबूती दी। इस पहल से 14.17 लाख स्टील की थालियां, 13.46 लाख कपड़े क...

कुम्भ से विश्व में बन रही भारत की सामग्र देश की छवि

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प्रयागराज के त्रिवेणी संगम से महाकुंभ के दृश्य पूरे देश को आह्लादित कर रहा है। उन दृश्यों को देखने और वहां से निकल रहे वक्तव्यों से पूरे विश्व में फैले सनातनियों के अंदर इच्छा बलवती हो रही है एक बार प्रयागराज महाकुंभ जाकर पवित्र त्रिवेणी की डुबकी अवश्य लगायें। पहले दिन 13 जनवरी को बुधादित्य महायोग के दिन का आंकड़ा एक करोड़ 75 लाख तो 14 जनवरी को लगभग 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का आया है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आंकड़ा 9 करोड़ को पार गया था। संपूर्ण विश्व आश्चर्यचकित हो इन दृश्यों को देखकर इसके पीछे की शक्ति और भावना को समझने की कोशिश कर रहा है। आप कल्पना करिए कि फरवरी तक जन समूह की संख्या कितनी पहुंच जाएगी। मोटा - मोटी आकलन है कि लगभग 40 करोड़ लोग संपूर्ण देश और विदेश से प्रयागराज महाकुंभ पहुंचेंगे। भगवा की बहुतायत लेकिन प्रकृति में उपस्थिति हर रंगों के लहराते ध्वज, पताके और विविध वेश पहने साधु -संत, गांव, आम देसी विदेशी जनों ने ऐसा विहंगम दृश्य प्रस्तुत किया है जिसका वर्णन आसान नहीं है। लगातार बजते घड़ी घंटाल, शंखों की गूंजती ध्वनि, मंत्रोच्चार, 24 घंटे प...

सनातन महापर्व: आस्था का महासंगम और वामपंथी नैराश्य

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भारत में होने वाला महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का जीवंत साक्ष्य है। यह पर्व डेढ़ महीने तक चलता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था की डुबकी लगाकर जीवन को धन्य मानते हैं। 13 जनवरी से 28 जनवरी तक इस महायज्ञ में कहीं भी कोई विघ्न न आने से, तथाकथित प्रगतिशील वामपंथी मीडिया और छद्म सेकुलर राजनीतिक दलों को निराशा हाथ लगी। उन्हें यह सहन नहीं हुआ कि भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से लोग यहाँ आकर ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ सनातन की भव्यता का अनुभव कर रहे थे। हिंदुत्व जागरण और वामपंथियों की व्याकुलता महाकुंभ में लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के मन में अध्यात्मिकता का संचार हुआ। यह जाग्रत हिंदू चेतना उन लिबरल और वामपंथी शक्तियों के लिए असहनीय थी, जो वर्षों से सनातन पर प्रहार करने में लगी थीं। उन्हें उम्मीद थी कि यह आयोजन विघ्नग्रस्त होगा, प्रशासन असफल होगा, और वे अपनी एजेंडा-धारित पत्रकारिता के माध्यम से सनातन संस्कृति को बदनाम कर सकेंगे। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो वे मायूस होकर बैठे रहे। भगदड़: वामपंथियों के...

दिव्य-भव्य महाकुंभ: भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति का वैश्विक प्रदर्शन

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रयागराज महाकुंभ को एक नए आयाम पर ले जाया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अद्वितीय है, बल्कि यह भारत की प्राचीन संस्कृति और सनातन परंपरा की शक्ति का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन भी है। वैश्विक राजनयिकों की भागीदारी 73 देशों के राजनयिकों की भागीदारी इस आयोजन की विशेषता को और बढ़ा देती है। इनमें अमेरिका, रूस, यूक्रेन, बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं, जो परस्पर विरोधी विचारधाराओं के बावजूद एक साथ संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने को तत्पर हैं। रूस और यूक्रेन जैसे देशों के राजदूतों का एक साथ आना, उनके बीच शांति और संवाद की एक नई पहल को प्रेरित करता है। यह दर्शाता है कि भारत अपनी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से दुनिया को शांति और सौहार्द्र का संदेश देने में सक्षम है। धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक महाकुंभ न केवल धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों, विचारधाराओं और परंपराओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक म...