2 अगस्त को 116 वीरों ने रच दिया इतिहास और फहराया तिरंगा!
2 अगस्त को 116 वीरों ने रच दिया इतिहास और फहराया तिरंगा!
"15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का एक हिस्सा 2 अगस्त 1954 तक पुर्तगालियों की गुलामी में था?"
जब देश आजाद हुआ, तब फ्रांस के कब्जे वाले क्षेत्र तो धीरे-धीरे भारत में मिल गए, लेकिन गोवा, दमन-दीव और दादरा-नगर हवेली पर पुर्तगालियों का कब्जा बना रहा। तत्कालीन सरकार की ओर से जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब कुछ युवाओं ने अपने शौर्य और पराक्रम से इस माटी को मुक्त कराने का बीड़ा उठाया।
⚔️ राजाभाऊ वाकणकर और 'मुक्तिवाहिनी' का गठन
जनवरी 1954 में संघ के प्रचारक राजाभाऊ वाकणकर के नेतृत्व में युवाओं का एक दल तैयार हुआ, जिसे नाम दिया गया 'मुक्तिवाहिनी'।
इस गुप्त अभियान में कई महानायकों ने अपना योगदान दिया:
* विश्वनाथ नरवणे (14 भाषाओं के ज्ञाता) ने सिल्वासा में रहकर पूरी व्यूह रचना की।
* प्रसिद्ध संगीतकार सुधीर फड़के और लता मंगेशकर जी ने संगीत कार्यक्रमों के जरिए इस अभियान के लिए धन जुटाया।
* संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी का आशीर्वाद लेकर इस अभियान की रूपरेखा तय हुई।
🌧️ 31 जुलाई की वो तूफानी रात
31 जुलाई 1954 की रात मूसलाधार बारिश हो रही थी। पुणे रेलवे स्टेशन से मुंबई होते हुए यह दल सिल्वासा पहुँचा। योजनाबद्ध तरीके से हमला करके पुलिस थाने, जेल और न्यायालय को मुक्त कराया गया। भारतीय वीरों का साहस देखकर पुर्तगाली सैनिकों ने घुटने टेक दिए।
प्रमुख प्रशासक 'फिंदाल्गो' को बंदी बना लिया गया, लेकिन भारतीय संस्कृति का परिचय देते हुए उनकी प्रार्थना पर उन्हें सुरक्षित बाहर जाने दिया गया।
🇮🇳 2 अगस्त 1954: सूर्योदय और फहराता तिरंगा
2 अगस्त 1954 की सुबह जब सूर्योदय हुआ, तो शासकीय भवन पर पुर्तगाली झंडे की जगह हमारा प्यारा तिरंगा गर्व से लहरा रहा था। केवल 116 स्वयंसेवकों ने अपनी जान बाजी पर लगाकर एक ही रात में पूरे क्षेत्र को स्वतंत्र करा लिया था।
इस ऐतिहासिक क्रांति में बाबूराव भिड़े, बाबासाहब पुरन्दरे, विनायकराव आप्टे, बिन्दु माधव जोशी, नाना काजरेकर, श्रीमती ललिता फड़के और श्रीमती हेमवती नाटेकर जैसे कई वीरों ने मुख्य भूमिका निभाई।
💭 एक अधूरा सम्मान जो 1998 में मिला
दुख की बात यह रही कि राजनीतिक कारणों से इन शूरवीरों को लंबे समय तक स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा नहीं मिला। आखिरकार वर्ष 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के दौरान इन वीरों को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अधिकारिक मान्यता और सम्मान दिया गया।
आज 2 अगस्त के इस ऐतिहासिक दिन पर हम उन सभी 116 निस्वार्थी वीरों के शौर्य और बलिदान को नमन करते हैं!
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