संबलन का वास्तविक अर्थ: कक्षा में बदलाव, न कि केवल रिपोर्ट में


संबलन का वास्तविक अर्थ: कक्षा में बदलाव, न कि केवल रिपोर्ट में
आज राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सांसी बस्ती (फलोदी शहर की पिछड़ी बस्ती) में मासिक संबलन के दौरान एक ऐसा अनुभव सामने आया, जिसने स्पष्ट कर दिया कि संबलन और निरीक्षण में कितना बड़ा अंतर है।
यह विद्यालय मेरे UCEEO क्षेत्र में आता है।
विद्यालय में कुल नामांकन 42 छात्र है और 3 शिक्षक कार्यरत हैं।

कक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति
निरीक्षण के दौरान कक्षा 1, 2, 3, 4 और 5 के कुल 15 बच्चे एक साथ एक ही कक्षा में बैठे पाए गए।
स्पष्ट रूप से कक्षा व्यवस्था अस्त-व्यस्त थी।
यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया—
मल्टी ग्रेड होना स्वयं में समस्या नहीं है,
समस्या यह है कि जब 3 शिक्षक उपलब्ध हैं, तो कम से कम 3 अलग-अलग समूहों में कक्षाएं संचालित की जानी चाहिए थीं।
परंतु ऐसा नहीं किया गया।
यह स्पष्ट रूप से शिक्षकों के स्तर पर कार्य निष्पादन की कमी को दर्शाता है।

संबलन या केवल औपचारिकता?
सामान्यतः संबलनकर्ता अधिकारी शाला संबलन एप में जानकारी भरकर अपना लक्ष्य पूरा कर लेते हैं।
मैं भी ऐसा कर सकता था—
डेटा भरता, रिपोर्ट अपलोड करता और आगे बढ़ जाता।
लेकिन आज उद्देश्य अलग था—
वास्तविक स्थिति को समझना और उसी क्षण सुधार की दिशा में काम करना।

एक प्रश्न जिसने बदलाव की शुरुआत की
मैंने शिक्षकों से पूछा—
“क्या आप ABL किट का उपयोग करते हैं?”
उत्तर मिला—
“पिछले 2 वर्षों से किट खोली ही नहीं, पैक पड़ी है।”
कारण—
“किट का स्तर ऊँचा है, बच्चों का स्तर कम है।”

एक शब्द—Flower, और जीवंत होती कक्षा
ABL किट से पहला कार्ड निकाला—flower
बिना अनुवाद बताए शब्द को समझाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
विद्यालय परिसर से सोनामुखी के पीले फूल मंगवाए गए।
अब बच्चे अनुभव से सीख रहे थे—
शब्द, वस्तु और अर्थ एक साथ जुड़ गए।

कैसे हुआ प्रभावी शिक्षण
बच्चों ने फूल को देखा, छुआ और पहचाना
चार्ट पर बने गुलाब और सूर्यमुखी के चित्रों से तुलना की
नोटबुक में चित्र बनाए
प्लेकार्ड से flower पढ़ना और लिखना सीखा
स्पेलिंग का अभ्यास किया
दीवार पर लगाने योग्य चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया गया

एक छात्र, तीन शिक्षक—और सीखने की नई दिशा
पाँचवीं कक्षा का केवल एक छात्र था,
लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह था कि
तीनों शिक्षक स्वयं यह सीख रहे थे कि प्रभावी शिक्षण कैसे किया जाए।

मुख्य संदेश
आज का अनुभव यह बताता है—
समस्या संसाधनों की कमी नहीं है
समस्या उनके उपयोग और कार्य विभाजन की है
मल्टी ग्रेड स्थिति को बहाना बनाकर एक ही कक्षा में सभी बच्चों को बैठाना समाधान नहीं है।
जब 3 शिक्षक हैं, तो न्यूनतम स्तर पर 3 शिक्षण समूह बनाना आवश्यक है।

निष्कर्ष
कक्षा व्यवस्था में सुधार अत्यंत आवश्यक
शिक्षक उत्तरदायित्व और कार्य विभाजन सुनिश्चित किया जाए
ABL किट जैसे संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो
संबलन को औपचारिकता से निकालकर वास्तविक सुधार का माध्यम बनाया जाए

एक पंक्ति जो सार बताती है
“संबलन वह नहीं जो एप में भरा जाए,
संबलन वह है जो कक्षा में बदलाव लाए।”

यह केवल एक विद्यालय की स्थिति नहीं,
बल्कि एक संदेश है—
यदि इच्छा हो, तो एक शब्द “flower” भी
पूरी शिक्षा व्यवस्था को आईना दिखा सकता है।

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही अच्छा बताया सा 🙏

    जवाब देंहटाएं
  2. ये ही वास्तविकता है आज मुझे आदर्श विद्या मन्दिर में कक्षा 6 में पढने वाली मेरी बच्ची नें मुझसे पूछा पापा! आपनें संस्कृत में कितने पाठ पढाएं तो मैने कहां एक और उसनें कहा मेरे भी एक तो मैने पूछा कि पहले पाठ में स्वरों के कितने प्रकार है तो कहा ऐसै नही हमें केवल वर्णमाला ही लिखवायी । समझनें की बात है कि शिक्षक को ये भी पता नही कि अधिगम विन्दु क्या है वे पारिभाषिक विभाजन,/शब्दावली के स्थान पर वे केवल वर्णमाला पढा रहे है वर्णमाला तो बच्चे कक्षा 1 से पढते आ रहे है।

    जवाब देंहटाएं
  3. सुधार कोई लाना,,,,,,चाहे तब ,,,,,,,,,,, जहां शिक्षक योग्य है वहां पाठन नहीं होता है,,,,,,,,,,,,,,, जहां पाठन होता,,,,,,,,,,, वहां शिक्षक नहीं है जैसे निजी विद्यालय

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नियति के क्रूर प्रहार के बीच मानवता की एक छोटी सी कोशिश

आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी संकल्प और वैश्विक चुनौतियों का जवाब