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आपकी हमारी सकारत्मकता ही कोविड महामारी से पार उतरेगी

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अमेरिका में भारत से दुगने लोगों को कोरोना हो चुका है और वहां भारत से तीन गुणा अधिक मृत्यु हुई है। ब्राजील में लगभग भारत जितने ही मामले हैं, मृत्यु भारत से ढाई गुणा ज्यादा। फ्रांस में पचपन लाख मामलों में ही एक लाख दो हजार लोगों की मृत्यु हो चुकी है। रूस में चालीस लाख से कुछ ज्यादा मामले हैं और मृत्यु एक लाख से अधिक हो चुकी है। ब्रिटेन में पैंतालीस लाख मामलों में ही एक लाख सत्ताईस हजार मौत हो चुकी है। यह एक छोटा सा आंकड़ा है। जो सिद्ध करता है कि महामारी से लड़ने में सभी नाकाम हैं। आज से नहीं, हमेशा हमेशा से। ध्यान रहे ये सभी देश बहुत आधुनिक और विकसित हैं। अमेरिका का भूक्षेत्र भारत से तीन गुणा बड़ा है और जनसंख्या मात्र पैंतीस करोड़। आधुनिकता में हमसे मीलों आगे है पर हाल देख लीजिए। यूरोप संपन्न है। आबादी कम है। विकसित हैं पर दुर्दशा देखिए। उसी तरह रूस और ब्राजील की स्थिति है। ये सब देश लंबे समय से विकसित हैं। एक व्यवस्था से चलने वाले देश हैं। भारत में मोदी की सरकार साढ़े छह साल पुरानी है। जिसके पास साठ वर्ष की सड़ियल लंतरानी है। अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का पहाड़ है। गद्दारों की भरमार है। इन...

जाग्रत समाज ही अपना स्वत्व प्राप्त करेगा

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भारत का इतिहास भी अभारतीयों के भरोसे रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि हम आत्मविस्मृत अवस्था में जीने लगे। आजादी के बाद से हिन्दू गौरव के इतिहास का पुनः संकलन कार्य आरंभ हुआ। नए नए अनुसंधान प्रारम्भ हुए ,जैसे जैसे सत्य इतिहास का अनुसंधान आगे बढ़ने लगा, सत्य से साक्षात्कार होने लगा त्यों त्यों हमे अपने गौरवशाली इतिहास की जानकारी मिलने लगी। अब हिन्दू उस गौरव की पुनर्प्राप्ति के सभी मार्ग अपनाने की दिशा में भी बढ़ चला है। इसी का एक पड़ाव श्रीराम मंदिर निर्माण है। मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारतवर्ष के 30 हजार धर्मस्थलों को ध्वस्त किया। श्रीराम जन्म स्थल पर बनी बाबरी ढांचा इसका प्रमुख साक्ष्य रहा। ऐसे अनेक स्थल है, जिसमें से एक प्रमुख स्थल कुतुबमीनार भी है जो साफ-साफ मंदिर के मलबे से बना दिखाई देता है। उसी तरह दूसरा बड़ा स्थान काशी-विश्वनाथ मंदिर है। इस मंदिर की छाती पर बनी आलमगिरी मस्जिद भी चीख चीख कर यही सत्य दोहराती है। यह बात केवल आँख के अंधें/बुद्धि से विकलांग वामपंथियों, सुडोसेकुलरों टुकड़े टुकड़े गैंग को नज़र नहीं आती। अयोध्या राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने का फैसला जब 9 नवंबर को आ रहा ...

स्वयंसेवको का परिवार भाव ही संघ की अनन्त शक्ति

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संघ की अपनी विशिष्ट कार्य पद्धति है, जो सतत 95 वर्ष से विकसित होती गई है। बहुत वरिष्ठ स्वयंसेवक कार्यकर्ता कभी कभी कहते है, संघ कार्य एक तरह से अनफोल्डिंग जैसा है, जो नित नूतन, चिर पुरातन जैसा है। इसमें चिर पुरातन जो है वह यह कि स्वयंसेवक के मन, मस्तिष्क आत्मा में राष्ट्र के प्रति अगाध श्रद्धा और दूसरे स्वयंसेवक के प्रति परिवार भाव। किंतु हाल ही में राहुल गांधी ने संघ परिवार शब्द को चर्चा में ला दिया है। वैसे तो आजकल राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से कोई समझदार व्यक्ति नहीं लेता है। लोग उनकी ऊल-जलूल बातों को गंभीरता से लेना स्वयं की तोहीन समझने लगे हैं। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो राहुल गांधी की बातों को हल्के में लेने लगे हैं। आजकल वे ट्विटर पर ट्वीट बम जैसा कुछ कुछ करने की जुगत में भी लगे हुए दिखाई देते हैं। उनके ट्वीट को ट्वीट बम कहना भी बम की तोहीन होगी। जब पालघर में दो साधुओं की पीट-पीट कर हत्या की जाती है, तो वे चुप रहते हैं। लेकिन जब किसी आसिफ को दो थप्पड़ पड़ जाते हैं तो ये उसे कई गुना बड़ा मुद्दा बना देते हैं। पादरियों पर लगे बलात्कार के असंख्य आरोपों पर वे शांत रह...

शिव के पूजन का सर्वोत्तम तरीका क्या है?

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भूतभावन भोलेनाथ को प्रसन्न करने की सर्वाधिक प्रचलित विधि है, रुद्राभिषेक, आइए रूद्राभिषेक के बारे में विस्तार से जानते है। सर्वदोष नाश के लिये रुद्राभिषेक विधि!! रुद्राभिषेक अर्थात रूद्र का अभिषेक करना यानि कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। जैसा की वेदों में वर्णित है शिव और रुद्र परस्पर एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही रुद्र कहा जाता है। क्योंकि- रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानि की भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है। रूद्र शिव जी का ही एक स्वरूप हैं। रुद्राभिषेक मंत्रों का वर्णन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में भी किया गया है। शास्त्र और वेदों में वर्णित हैं की शिव जी का अभिषेक करना परम कल्याणकारी है। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारे पातक-से पातक कर्म भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि...

निधि समर्पण राम काज

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लिए फिरते है सिर दसों यहां अब रावण रोया करते है, साबित करते यह धरा राम की, छिप-छिप मारीच बनते है। अब चली बयारें अवध चली राम काज जो करना है, नव खिली बसंत हर चेहरे पर नव भान आलोकित होना है। चहुँओर ऋषि मुनि घूम रहे घट रामलला लिए झूम रहे शबरी निषाद की कुटियाओं से झोली मोहरों से खूब भरे। साबित है यह देश राम का  यहां घट-घट बसते रघुवर है वानर टोली हर देहरी पर लेती निधि समर्पण है। खूब गिलहरियां उमंगित है प्रभु भक्तन पंथ निहार रही हम भी कुछ-कुछ अर्पण कर दे दादी पर छाप जो अमिट रही। ऋषि मुनि आह्लादित हर द्वार हर गली अयोध्या हुई जाती है भक्त राम के झोली भरते हर घर दीवाळी हुई जाती है। ....."सागर",महेंद्र थानवी। जानिए भारत के सबसे अयोग्य नेताओ के बारे में

वैदिक साहित्य और अशोक-स्तंभ !

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प्रो. वासुदेवशरण अग्रवाल भारतीय बौद्धिकता के उच्चतम शिखर है। इतिहास व साहित्य पर किया गया कार्य उनकी विद्वता को प्रमाणित करता है। न केवल 'पाणिनि कालीन भारत' बल्कि 'पद्मावत' जैसे महाकाव्य की 'संजीवनी व्याख्या' लिखकर उन्होंने विद्वत समाज को अपने इतिहासबोध और साहित्य दृष्टि का लोहा मनवाया। जानिए भारत के सबसे अयोग्य नेता की सूची में किसने बनाया स्थान? प्रो. साहब ने सन 1967 में 'चक्रध्वज' नामक एक पुस्तक लिखी। जो 'राष्ट्रीय पुस्तक न्यास' से प्रकाशित हुई । इस पुस्तक में उन्होंने राष्ट्रध्वज में अंकित 'अशोक-चक्र' को मौर्यकाल के सीमित दायरे से निकालकर भारत की पाँच हजार वर्षों से चली आ रही परम्परा के आयाम के रूप में स्थापित किया। पुष्ट तथ्यों और प्रभावी तर्कों द्वारा उन्होंने यह सिद्ध किया कि अशोक स्तम्भ का स्वभाव वैदिककाल से सतत जुड़ा हुआ है। उन्होंने लिखा कि ऋग्वेद के अनुसार पृथ्वी का आधार एक स्तम्भ है तथा समस्त संसार उस स्तम्भ से अव्यक्त रूप से जुड़ा हुआ है। उस स्तम्भ के शिखर पर काल व भव के प्रतीक के रूप में सूर्य विद्यमान है। यह सूर्य रूपी चक्र स...

जानिए भारत का सबसे अयोग्य नेता कौन है?

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वर्तमान में भारत मे 1 नहीं ढेरों अयोग्य नेताजी हैं, जो अपने दम पर पार्षद तो क्या मोहल्ला कमेटी का सदस्य भी नही बन सकते। ये सब नेताजी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, तो परिचय देने की आवश्यकता नहीं है, आप सिर्फ फ़ोटो देखिए। 1 इनका नाम है तेजस्वी यादव, इन्हें सुनिए सारे टेंशन भूल जाएंगे। 2 इनके हज़ारों वीडियो यूट्यूब, फेसबुक पर उपलब्ध हैं,, 3 ये हैं भविष्य के रागा। 4 ये भाईसाहब तो बहुत ही जोरदार हैं, इनके कहने ही क्या, समझ ही गए होंगे ये कहना क्या चाहते हैं? 5 इनकी सिर्फ 1 उपलब्धि है कि इनकी नाम स्विंग होती है। 6 इनकी नाक और बाल दादी से मिलते हैं, 7 खो न जाएं ये तारे ज़मीन पर। इसपर 1000 अपवोट तो बनते हैं, धन्यवाद।। धन्यवाद।।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में फलोदी परगने का योगदान

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में फलोदी परगने का योगदान विश्व का प्रत्येक राष्ट्र गुलामी को हेय और आजादी को श्रेष्ठ मानता है अतः जब धोखेबाजी के चलते भारत को पहले मुगलों ने एवं बाद में ब्रिटेन के अंग्रेजों ने गुलाम बनाया तो गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने करने के लिए भारतीय जनता बेताब हो गई उस लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार 15 अगस्त 1947 को ब्रिटेन की गौरी सरकार से आजादी प्राप्त कर ली। स्वतंत्रता आंदोलन में फलोदी परगने की जनता का योगदान-  अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता यह कहावत मशहूर है। इसी संदर्भ में तत्कालीन भारत के विभिन्न प्रांतों में रहने वाली जनता जंगे आजादी के मैदान में कूद पड़ी। इस संग्राम में राजस्थान के जोधपुर जिला अंतर्गत फलोदी तहसील की जनता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह कहना उपयुक्त होगा की रोजी रोटी रोटी के लिए भारत भर के तत्कालीन प्रांतों में फैली हुई, फलोदी परगने की जनता ने इस आजादी आंदोलन में तन मन धन से दिल खोल कर अपनी आहुति प्रदान की। ब्रिटिश भारत में आजादी आंदोलन का सबसे बड़ा गढ़ मुंबई प्रांत रहा, जो कि सिंध तक फैला हुआ था। फलौदी नगर एवं परगने की जनता का प्रगाढ़ सम्बन्ध भी यहां...

पंजाब में मोदी सरकार द्वारा एमएसपी पर धान की खरीद क्या संकेत देती है, डाटा से समझें

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ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पंजाब के किसानों द्वारा उगाई गई संपूर्ण धान की फसल को 1 अक्टूबर से शुरू हुए खरीफ के बिक्री मौसम में खरीद लिया है। पीआईबी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार पंजाब से 2.028 करोड़ टन धान खरीदी गई जो कि पूरे देश से कुल खरीदी गई 3.18 करोड़ टन धान का 67 प्रतिशत है। इसका अर्थ हुआ कि अकेले पंजाब से ही देश की कुल धान खरीद का दो-तिहाई भाग आया। लेकिन यहाँ पर एक मोड़ है। कृषि मंत्रालय के फर्स्ट एडवांस एस्टिमेट (पहले अनुमान) के अनुसार इस वर्ष 10.236 करोड़ टन खरीफ चावल के उत्पादन की अपेक्षा थी, वहीं पिछले वर्ष 10.198 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था।  अगर खरीद के डाटा के अनुसार देखें तो अभी तक जितनी धान खरीदी जा चुकी है, उससे 2.13 करोड़ टन चावल प्राप्त होंगे। इसका अर्थ हुआ कि केंद्र ने जुलाई 2020-जून 2021 के लिए खरीफ चावल के उत्पादन का 20 प्रतिशत से अधिक भाग खरीद लिया है। पंजाब से खरीदी गई धान से 1.358 करोड़ टन चावल प्राप्त किए जा सकते हैं। धान की फसल सिर्फ खरीफ मौसम में ही होती है जिसका अर्थ हुआ कि जुलाई 2021 तक के लिए उत्पादन हो चुका है। डाटा के अनुसार पंजाब ने...

विजय दिवस विशेष

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16 दिसंबर को हम सभी विजय दिवस के रूप में मनाते है। 16 दिसंबर 1971 को भारत की पाकिस्तान पर विजय की स्मृति के रूप में इस दिवस को हम पिछले 49 वर्षों से मनाते आ रहे हैं क्या है। इस दिन का महत्व क्या है? इस युद्ध में कैसे विजय मिली? युद्ध के दौरान क्या-क्या घटनाएं हुई? इस युद्ध के मुख्य नायक कौन-कौन थे? इस विजय का इतना अधिक महत्व क्यों हैं? क्या है 93000 पाक सैनिकों के आत्मसमर्पण का सच? वर्तमान पीढ़ी इन सब से अनभिज्ञ है। आइए इस आलेख के माध्यम से इसके बारे में सब कुछ जानने का प्रयास करते हैं। नए संसद भवन की 10 विशेताएँ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि- भारत से अंग्रेजों का जाना सुनिश्चित होने के काफी पहले से उन्होंने अपनी कूटनीति के चलते भारत के टुकड़े करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया था। वैसे तो अंग्रेजों ने 1857 से ही भारत विखंडन के कार्य पर काम प्रारंभ कर दिया। किंतु इस दिशा में विश्व युद्ध के बाद उन्होंने तेजी से काम किया। भारत का हिंदू मुस्लिम आबादी के अनुसार विभाजन हुआ। जिसका परिणाम पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान का उदय के रूप में हुआ। पाकिस्तान के उदय के बाद से ही हमारा देश ...

नए संसद भवन की 10 विशेषताएं जानिए

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नया संसद भवन राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा। अब भारत बदल रहा है। एक एक करके गुलामी के प्रतीकों से निजात पा रहा है। राष्ट्रीय गौरव का भान जब जागता है तब पुराने प्रतीकों को नष्ट करना, अर्थात पहले की लकीर को मिटाना यह सामान्य इंसानों के व्यवहार में देखा जाता है। किंतु मोदीजी जैसे महामानवों का चिंतन, विचार और व्यवहार उच्च कोटि का है। वे छोटी  लाइन को मिटाने के स्थान पर उसके पास और अधिक बड़ी लाइन खींचने में विश्वास करते है। इसी नीति का पालन करते हुए, नया भव्य आवश्यकता के अनुरूप संसद भवन बनने जा रहा है। भारत के संसद भवन की तस्वीर अब बदलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली में नए संसद भवन की नींव रख दी है। आजादी के 75 साल पूरे होने तक ये नई बिल्डिंग तैयार हो जाएगी। यह नया भवन मौजूदा बिल्डिंग से अधिक बड़ा, आकर्षक और आधुनिक सुविधाओं वाला है। नए संसद भवन से जुड़ी 10 खास महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं- 1. पुराने संसद भवन से इतर नई बिल्डिंग में आधुनिक तकनीक और जरुरतों का ध्यान रखा जा रहा है। अगस्त 2019 में मौजूदा लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की ओर से नए संसद...

संघ नींव में विसर्जित पुष्प भाग १

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संघ संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आज कौन नहीं जानता ? भारत के कोने-कोने में इसकी शाखाएँ हैं। विश्व में जिस देश में भी हिन्दू रहते हैं, वहाँ किसी न किसी रूप में संघ का काम है। संघ के निर्माता डा. केशवराव हेडगेवार का जन्म एक अपै्रल, 1889 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, वि. सम्वत् 1946) को नागपुर में हुआ था। इनके पिता श्री बलिराम हेडगेवार तथा माता श्रीमती रेवतीवाई थीं। केशव जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उन्हें नगर में घूमते हुए अंग्रेज सैनिक, सीताबर्डी के किले पर फहराता अंग्रेजों का झण्डा यूनियन जैक तथा विद्यालय में गाया जाने वाला गीत ‘गाॅड सेव दि किंग’ बहुत बुरा लगता था। उन्होंने एक बार सुरंग खोदकर उस झंडे को उतारने की योजना भी बनाई; पर बालपन की यह योजना सफल नहीं हो पाई। वे सोचते थे कि इतने बड़े देश पर पहले मुगलों ने और फिर सात समुन्दर पार से आये अंग्रेजों ने अधिकार कैसे कर लिया ? वे अपने अध्यापकों और अन्य बड़े लोगों से बार-बार यह प्रश्न पूछा करते थे। बहुत दिनों बाद उनकी समझ में यह आया कि भारत के रहने वाले हिन्दू असंगठित हैं। वे ज...

क्रिसमस और न्यू ईयर पर पटाखे चलाने की छूट, भारतीय त्यौहारों पर प्रतिबंध !

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दिवाली से ठीक पहले कांग्रेस शासित सरकारों की तरह दिल्ली सरकार ने दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए 9 नवंबर से 30 नवंबर तक पटाखे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिये थे। सेकुलर राजनेताओं की तरह गुलाम मानसिकता के पत्रकार, साहित्यकार भी होली, दिवाली जैसे भारतीय त्यौहारों पर पानी बचाओ, भविष्य बचाओ! प्रदुषण मुक्त भारत! जैसे कोटेशनों के बहाने अपनी दुषित बौद्धिक क्षमता का बखान करते रहते हैं। लेकिन बकरीद पर लाखों बकरों के कटने से नदियों का रंग लाल हो जाने, मुस्लिम बस्तियों में सडांध से पैदा हो रहे विषाणुओं/बिमारियों, अजान के दौरान मस्जिदों पर लाउड स्पीकर के इस्‍तेमाल से होने वाले ध्‍वनि प्रदूषण पर न्यायालयों के निर्णयों की लगातार उपेक्षा, क्रिसमस पर हजारों पेड़ काट दिये जाने से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकुल प्रभाव पर भारतीय सभ्यता/संस्कृति से घृणा करने वाली अवार्ड वापसी गैंग व एकमुश्त मुस्लिम वोटों के भूखे भेड़िये मौन धारण कर लेते हैं! कोर्ट में याचिका डालकर होली, दिवाली और दही हांडी जैसे भारतीय त्यौहारों पर अपनी खीझ निकालने वाले ईद, मुहर्रम और  क्रिसमस पर एक शब्द नहीं बोलते! पटाखों पर बैन का व...