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दीपावली पर रंगोली से हर घर द्वार सजेंगे

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दीपावली का अवसर हो और रंगोली का जिक्र न हो यह कैसे सम्भव है। हर दिवाली से पहले घर की बेटियां, बहुएं उत्साह के साथ तैयारी करके रखती है कि इसबार रंगोली कैसी बनेगी। हफ़्तों तक रंगोली का चिंतन और चर्चा चलती है। आइए आपके साथ कुछ विचार और डिजाइन साझा करते है। भारत उत्सव का देश है। यहां वर्ष भर कोई न कोई उत्सव चलता ही रहता है। उत्सवों को मनाने की यहां अपनी एक परंपरा है।  उत्सव हो और  रंगोली ना बनाई जाए तो उत्सव अधूरा माना जाता है। उत्सव मानव जीवन में उत्साह को प्रदर्शित करने का एक अनूठा प्रयोग है। भारतीय जीवन उत्साह से भरा हुआ है। यहां जीवन के प्रति दर्शन दुनिया में भिन्न प्रकार का है। जीवन भर भौतिक सुख संपदा के पीछे ना भागकर केवल अपने आनंद और सुख से जीवन व्यतीत करने की ओर ध्यान रहता है। यह अलग तरह की फिलॉसफी है। भारत के उत्सवों में भिन्नताए तो दिखाई देती है। स्थान विशेष की विशेषताएं भी दिखाई देती है। मनाने के तरीकों में विभिन्नताए भी पाई जाती है। किंतु कुछ बातें सामान्य रूप से एक जैसी दिखाई देती है, जो यह सिद्ध करती है कि संपूर्ण राष्ट्र एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। 1) सबसे पहली बात है उत्स...

अर्नब की जमानत क्या कहती है?

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बताओ किस पत्रकार के लिए कभी ऐसा क्रेज दिखा आज तक? यह भारत माता की जय की आवाज उद्धव ठाकरे की राजनीति की समाप्ति की घोषणा है ठाकरे को यह समझ में नहीं आया कि उसका शिकार कैसे किया गया है जाने किसने ठाकरे का राजनैतिक शोषण किया है जिस व्यक्ति के पीछे जनता खड़ी होती है उसको इतनी आसानी से भुला नहीं सकते अभी अर्णब गोस्वामी बिना चुनाव लड़े बिना किसी पार्टी में गए बड़ा नेता बन गया है आप विचार करो की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उसने कितनी कीमत चुकाई है और उच्चतम न्यायालय ने उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अक्षुण रखा है और महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र हाई कोर्ट को जो नसीहत दी है अगर उनमें शर्म है तो उनको माफी मांगनी चाहिए। संघ का विराट दर्शन, क्या जानते है आप संघ के बारे में? लोकतंत्र में भारत की आस्था अक्षुण्ण थी, है और रहेगी। जेल की काल-कोठरियों और जंज़ीरों के सींखचों में क़ैद कर आप शरीर को बंधक बना सकते हैं, आत्मा को नहीं। तख़्तों-ताजों की दुनिया के 'बादशाह' अक्सर यह भूल जाते हैं। लोकतंत्र में असहमति स्वीकार्य है, पर तानाशाही नहीं। सत्य के निर्भीक स्वरों, इरादों और हौसलों के आगे निरं...

मैं अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति हूँ आखिरी नहीं: कमला हैरिस

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मैं अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति हूँ आखिरी नहीं:  कमला हैरिस  ने यह कहकर लोकतंत्र में सम्भावनाओं के खुले द्वार का संकेत किया है। कौंन है कमला हैरिस? भारत से इनका क्या सम्बन्ध है? कमला हैरिस के चुने जाने से भारत में उत्साह क्यों है? आइए जानते है... अमेरिका से हजारों मील दूर दक्षिण भारत के सुदूर एक गांव में अमेरिकी चुनाव में कमला हैरिस की जीत का जश्न मनाया जा रहा है। तमिलनाडु के तिरुवरुवर के गांव  थुलासेंद्रापुरम  में लोग रंगोली बना रहे हैं, कमला हैरिस की फोटो साथ में लेकर खूब आतिशबाजी की जा रही है। मीडिया भी इसको लेकर बहुत उत्साहित है। भारतीय मीडिया में विशेष उत्साह नजर आ रहा है। दरअसल, यही वो गांव है जहां अमेरिका की उपराष्ट्रपति बनने जा रहीं कमला हैरिस की मां  श्यामला गोपालन   रहती थीं। श्यामला गोपालन मात्र 19 साल की उम्र में भारत से अमेरिका चली गई थीं। अब 150 घरों के इस गांव में कमला की जीत का जश्न मनाया जा रहा है। रविवार सुबह इस गांव के घर के बाहर रंगोली बनाई गई और लिखा गया 'बधाई हो कमला हैरिस', 'आप हमारे गांव का गर्व हो', 'वनक्कम अमेरिका।' क्या आप जानते...

क्या आप जानते है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का पैतृक घर किस भारतीय ने खरीदा?

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देश-विदेश में विलक्षण कारनामें के लिए प्रसिद्ध पंजाबी पूरी दुनिया में छाए हुए है। ऐसा ही एक और कारनामा करते हुए सिख नेता सुखदेव सिंह कंग ने ऑल इंडिया कांग्रेस की प्रधान सोनिया गांधी का पैतृक घर खरीद कर सबको हैरान कर दिया है। आओ सही इतिहास जानें इस संबंध में बातचीत करते सुखदेव सिंह कंग ने कहा कि कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी का इटली स्थित जिस घर में जन्म और पालन पोषण हुआ है, उस घर को आज भी लोग देश-विदेश से बड़ी तादाद में देखने के लिए पहुंचते हैं क्योंकि उनकी बचपन से लेकर जवान होने तक की यादें इस घर के साथ जुड़ी हुई हैं। कंग ने कहा कि सोनिया गांधी का घर ख़रीदना मेरे लिए सौभाग्य वाली बात है और इस घर का सारा समान पहले की तरह ही लोगों के देखने के लिए रहने दिया जाएगा जिसमें कोई तबदीली नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह घर खरीदने के बाद मुझे देश-विदेश से कई प्रसिद्ध हस्तियों की तरफ से लगातार बधाई मिल रही हैं।

आओ सही इतिहास जानें: वीरों/वीरांगनाओं की शौर्य गाथा

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महाराणा सांगा राणा संग्राम सिंह सिसोदिया, जिन्हें हम राणा सांगा के नाम से जानते हैं। १६वीं शताब्दी (16th Century) के सबसे शक्तिशाली मेवाड़ी शासक थे। इनकी शौर्य गाथा पर मेवाड़ी आज भी गर्व महसूस करते हैं। राणा सांगा को भारतीय इतिहास के महानायक तथा वीर के रूप में, देशभक्तों द्वारा हमेशा याद किया जाएगा। तो आइए जानते हैं उनके बारे में। ● कौन थे राणा संग्राम सिंह सिसोदिया? महाराणा संग्राम सिंह, उदयपुर में सिसोदिया राजवंश के राणा रायमल के सबसे छोटे सुपुत्र थे। कुंवर पृथ्वीराज और जगमाल, राणा सांगा के भाई थे। एक दिन भविष्यकर्त्ता ने राणा रायमल से कहा कि आपका यह बेटा (राणा सांगा) मेवाड़ का सबसे प्रसिद्ध शासक बनेगा और अपनी वीरता के लिए इतिहास में याद रखा जायेगा। सांस्कृतिक राष्ट्रभाव की और कदम बढ़ाते हिन्दू यह सुनकर कुंवर पृथ्वीराज व जगमाल अपने भाई राणा सांगा को मारने के लिए षड्यंत्र रचने लगे ताकि राणा सांगा को सत्ता के रास्ते से हटाया जाए। परंतु सांगा को इस बात की भनक लग गई और वो किसी प्रकार राजधानी से बचकर अजमेर पलायन कर गए। कुछ समय अजमेर में बिताने के पश्चात सन् 1509 में अजमेर के कर्मचन्द पंवार क...

क्या आप जानते है, दवाई के पत्तों में बीच में खाली जगह क्यों होती है?

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कई बार जब हम मेडिकल शॉप पर दवाइयां खरीदने जाते हैं तो कुछ दवाई के पत्तों के बीच खाली जगह होती है। जब यहाँ दवाइयां नहीं होती है तो भला ये जगह क्यों खाली रखी जाती है, ये सवाल हम में से बहुत लोगों के दिमाग में आता होगा। आज हम आपको इसी सवाल का जवाब बताने जा रहे हैं। जूनागढ़ रियासत भारत में कैसे शामिल हुई? दरअसल दवाईयों के बीच होने वाली खाली स्पेस दवाइयों के केमिकल को आपस मे मिलने से रोकती है। ये बात आप शायद नहीं जानते हों कि ये कैमिकल आपस में रिएक्शन कर सकते हैं और इस से दवाइयां खराब हो जाती है। इसलिए इन दवाइयों को खराब होने से बचाने के लिए ये जगह खाली छोड़ी जाती है। इस से ये दवाइयां सुरक्षित रहती है। इसी स्पेस की वजह से हम पत्तों को आसानी से काट भी लेते हैं।  इन 5 कारणों से फोन होता है स्लो चार्ज दवाइयों को एक जगह से दूसरी जगन पहुंचाने के लिए भी यह स्पेस काम आता है। ये एक तरह से कुशनिंग इफेक्ट की तरह काम करती है। इन खाली स्पेस से दवाइयां पैकेजिंग मशीन में भी नहीं फंसती है।  डॉ भाभा भी हुए थे सुभाष चन्द्र बोस की तरह किसी षड्यंत्र का शिकार? इसका एक कारण यह भी है कि इस से ...

जूनागढ़ रियासत पाकिस्तान के बजाय भारत में कैसे शामिल हुयी, जानिये 7 बातें

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आज हम इतिहास की किताबों में दबा एक ऐसा वाकया लेकर आये हैं. जो शायद कम ही लोगों का पता होगा. दरअसल हम उस चुनाव की बात कर रहे हैं. जो अगर न होता तो शायद आज गुजरात का एक मह्त्वपूर्ण हिस्सा हमारे पास नहीं पाकिस्तान के पास होता. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की तरफ बढ़ता हिन्दू समाज ये बात उस समय की है जब साल 1948 में भारत के लोगों ने पहली बार वोट डालकर जूनागढ़ रियासत को पाकिस्तान की बजाय भारत का हिस्सा चुना था. ऐसा कहा जाता है कि जूनागढ़ के नवाब महाबत खान नहीं चाहते थे कि जूनागढ़ भारत का हिस्सा बने. जबकि बंटवारे के कुछ समय बाद ही सरदार पटेल ने रियासतों को भारत में विलय करवाने का बीड़ा अपने हाथ में उठा रखा था. ऐसी भी बातें हैं कि मोहम्मद अली जिन्ना ने जूनागढ़ के नवाब महाबत खान को जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था. महाबत खान की ना नुकुर की वजह से इंडियन आर्मी ने 9 नवंबर 1947 में जूनागढ़ में घुसकर कब्जा कर लिया था. कोरोना मुक्ति के लिए जन आंदोलन समय की मांग, क्या करें? इसके कुछ समय बाद ही जूनागढ़ में 20 फरवरी 1948 को वोटिंग हुयी. आपको बता दें कि ये चुनाव का आजाद भारत का पहला चुना...

इन 5 कारणों से होता है आपका स्मार्ट फोन स्लो चार्ज, कहीं आप भी तो यही गलती नहीं करते है?

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एंड्रॉइड स्मार्टफोन आने से पहले मोबाइल फोन सिर्फ कॉल करने या मैसेज करने तक ही सीमित थे लेकिन अब लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं। आजकल नई टेक्नोलॉजी वाले स्मार्टफोन बाजार में आ चुके हैं जोकि फास्ट चार्जिंग से लैस हैं। लेकिन अक्सर लोग अपने स्मार्टफोन के स्लो चार्ज होने से परेशान रहते हैं। स्मार्टफोन के स्लो चार्ज होने के पीछे भी कई कारण होते हैं जिन पर जल्दी से ध्यान नहीं जाता, अगर आपका स्मार्टफोन भी स्लो चार्ज होता है तो यहां हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप भी अपने स्मार्टफोन को फास्ट चार्ज कर सकते हैं। पाएंगे। 1. ऑरिजिनल चार्जर का करें यूज स्मार्टफोन चार्ज करते समय हमेशा ओरिजिनल चार्जर का इस्तेमाल ही करते हैं, मार्किट में मिलने वाले नकली और सस्ते चार्जर का इस्तेमाल बिलकुल न करें, ऐसा करने से स्मार्टफोन के फटने के चांस भी बहुत ज्यादा रहते हैं साथ स्मार्टफोन के खराब होने का खतरा। होने का भी खतरा रहता है। 2. बैक कवर हटाकर चार्ज करें हम सभी अपने स्मार्टफोन को सेफ रखने के लिए फोन पर बैक-कवर लगाते हैं लेकिन शायद आप नहीं जानते हैं कि बैक-कवर लगाकर फोन ...

खगोलविज्ञान और ज्योतिषी के ज्ञाता थे महर्षि वाल्मीकि

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भारत वर्ष ॠषि, मुनियों, महर्षियों की जन्म भूमि एवं देवी-देवताओं की लीला भूमि है। हमारी सनातन संस्कृति विश्व मानव समुदाय का मार्गदर्शन करती है, यहाँ वेदों जैसे महाग्रंथ रचे गए तो रामायण तथा महाभारत जैसे महाकाव्य भी रचे गये, जिनको हम द्वितीयोSस्ति कह सकते हैं क्योंकि इनकी अतिरिक्त विश्व में अन्य कोई महाकाव्य नहीं रचे गये जो जन-जन तक प्रसारित हुए तथा आज भी जन-जन में लोकप्रिय हैं। ऐसे ही एक महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि हुए हैं। महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि कहा जाता है क्योंकि वाल्मीकीय रामायण संस्कृत साहित्य का एक आरम्भिक महाकाव्य है जो संस्कृत भाषा में अनुष्टुप छन्दों में रचित है। इसमें श्रीराम के चरित्र का उत्तम एवं विस्तारित विवरण काव्य रूप में किया गया है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित होने के कारण इसे ‘वाल्मीकीय रामायण’ कहा जाता है।  वर्तमान में राम के चरित्र पर आधारित जितने भी ग्रन्थ उपलब्ध हैं उन सभी का मूल महर्षि वाल्मीकि कृत ‘वाल्मीकीय रामायण’ ही है। ‘वाल्मीकीय रामायण’ के प्रणेता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर संस्कृत के इस आदि क...

क्या डॉ भाभा भी सुभाष चंद्र बोस की तरह किसी षड्यंत्र के शिकार हुए थे!!!

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केवल राजनेताओं की जयंतिया याद रखने वाले हे मेरे परम सम्मानीय देशवासियों!!  आज देश की एक महान विभूति की जयंती है जिनकी प्रतिभा एवं दूर दृष्टि के कारण ही आज हम ना केवल परमाणु शक्ति संपन्न है वरन दुनिया की आंख से आंख मिलाकर बात करने का दम भी रखते हैं। आज भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक संस्थापक स्वप्न द्रष्टा डॉ होमी जहांगीर भाभा का जन्मदिन है। उनके जन्मदिन के अवसर पर आज जानिए उनके व्यक्तित्व की (होमी जहांगीर भाभा की) अनसुनी बातें। भारत के महान परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई के एक समृद्ध पारसी परिवार में हुआ था। उन्हें भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम का जनक कहा जाता है।  उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम के भावी स्वरूप की मजबूत नींव रखी जिसके चलते भारत आज विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की पंक्ति में आगे खड़ा है। उन्होंने जेआरडी टाटा की मदद से मुंबई में ‘टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च’ की स्थापना की और वर्ष 1945 में इसके निदेशक बने। देश के आजाद होने के बाद उन्होंने दुनिया भर में रह रहे भारतीय वैज्ञानिकों से भारत लौटने की अपील की थी। वर्ष...

सऊदी का भारत को दीपावली गिफ्ट

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सऊदी अरब ने भारत को दीपावली का सबसे शानदार उपहार दे दिया है। इस उपहार को लेकर सारी दुनिया हैरानी में पड़ गई है। यह भारत की कूटनीतिक विजय की श्रंखला की एक और कड़ी है। दरअसल सऊदी ने पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए कश्मीर (POK) और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के नक्शे से हटा दिया है। इस नक्शे को लेकर भारत में बहुत प्रसन्नता है। लेकिन पड़ोसी देश इस पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इस नक्शे को लेकर POK कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने ट्वीट पर नक्शे की तस्वीर भी ट्वीट की है। सऊदी अरब ने 21-22 नवंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन के तहत बैंकनोट पर प्रदर्शित विश्व मानचित्र में गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्सों के रूप में नहीं दिखाया है। यह नक्शा पाकिस्तान के अपमान रूप में सऊदी ने पेश किया है। जानकारी के लिए बता दें कि पूर्व में भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव पर आपत्ति जताई थी। इसी तरह से पाक अक्सर हर मंच पर कश्मीर मुद्दा उठाता है। लेकिन हर बार भारत की सरकार एक ही बात कहती है कि- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, तथाकथित गिलगित और बाल्टिस्तान सहित, भारत का एक अभिन्न हिस्सा ...

करपात्री महाराज ने इंदिरा गांधी को क्यों श्राप दिया?

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भारतीय इतिहास में संसद भवन पर पहला हमला! हमलावर साधु संत! गौ रक्षक! जिस तरह से तुम ने साधु संतों पर गोलियाँ चलवायी हैं, ठीक इसी तरह से एक दिन तुम भी मारी जाओगी।  - स्वामी करपात्री द्वारा इंदिरा गांधी को दिया श्राप दिन - 7 नवम्बर 1966 मृतक संख्या - 10? 250? 375? 2500? या ज़्यादा? आइए जानते हैं भारतीय इतिहास की इस महत्वपूर्ण तारीख़ का जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। राजीव, इंदिरा और संजय गांधी, प्रश्न में जिन तीनों की मौत का ज़िक्र किया गया है, वो हैं इंदिरा गांधी व उनके दोनों पुत्र संजय गांधी ऐंव राजीव गांधी। जानते हैं पहले करपात्री महाराज को।, स्वामी करपात्री (1907 - 1982) भारत के एक तत्कालीन सन्त, प्रकाण्ड विद्वान्, गोवंश रक्षक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं राजनेता थे। उनका मूल नाम हरि नारायण ओझा था, किन्तु वे "करपात्री" नाम से ही प्रसिद्ध थे क्योंकि वे अपने अंजुली का उपयोग खाने के बर्तन की तरह करते थे। धर्मशास्त्रों में इनकी अद्वितीय एवं अतुलनीय विद्वता को देखते हुए इन्हें 'धर्मसम्राट' की उपाधि प्रदान की गई। इंदिरा गांधी और स्वामी करपात्री, 1965 से भारत के ...

विजयादशमी पर विशेष: सांस्कृतिक राष्ट्रभाव की ओर बढ़ता भारत का मूल समाज

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जड़ों की तरफ बढ़ते कदम- वर्तमान में भारत अपनी जड़ों की तरफ कदम बढ़ा चुका है। भारत अपने उस अतीत की ओर जो गौरवशाली है, उस अतीत की ओर जो वैभवशाली है लौट रहा है। आज उन करोड़ों भारतीयों का जीवन उद्देश्य साकार रूप ले रहा है, जो परतंत्रता के काल में सैकड़ों वर्षो के दौरान इस वैभवशाली स्थिति को प्राप्त करने के लिए संघर्षरत रहे है। भारत आज पुनः भारतवर्ष बनने की ओर कदम बढ़ा चुका है। भारत की सर्वांगीण सुरक्षा, स्वतंत्रता और विकास के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास प्रारंभ हो रहे हैं। वास्तव में इस सबके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1925 से अविरत कार्यरत है। इस दिशा में अपनी स्थापना दिवस विजयादशमी के अवसर पर संघ प्रतिवर्ष एक कदम और आगे बढ़ जाता है। संघ राष्ट्र जागरण का एक मौन सशक्त आंदोलन बन चुका है। संघ स्वयंसेवकों का प्रखर राष्ट्रवाद आज भारत के कोने कोने में देश प्रेम, समाजसेवा, हिंदू जागरण और राष्ट्रीय चेतना की अलख जगा रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले विशाल हिंदू समाज के प्रत्येक पंथ, जाति, वर्ग के अनुयायियों की सम्मिलित विजयशालिनी शक्ति के आज जो दर्शन हो रहे हैं, उसके पीछे संघ का ही अथक, अविरत पर...