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भगवान वेदव्यास ऋषि पुत्र-1

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भगवान वेदव्यास यमुना के तट पर ऊंचे ऊंचे वृक्षों की कतारें फैली हुई थी। निकट ही एक छोटी सी झोपड़ी थी। किनारे के पास एक नौका थी। रेत पर मछली पकड़ने का सामान बिखरा पड़ा था। हवा का झोंका आता और अपने साथ मरी हुई मछलियों की तेज दुर्गंध ले फेल जाता था। वह झोपड़ी आसपास बसे हुए मछुआरों की संपत्ति थी। उस बस्ती के मुखिया का नाम दश था। उसने सत्यवती नामक एक बालिका को अपनी कन्या के समान पाला पोसा था। वह उसकी सेवा करती थी। उस एकाकी झोपड़ी में केवल वे दो ही रहते थे। अन्य झोपड़ियां वहां से दूर थी। मछुए की श्रवण शक्ति तेज थी। उसे बाहर से कुछ आवाज सुनाई दी। उसने अपनी कन्या को बुलाकर कहा- सत्यवती जाकर देख तो क्या बात है? सत्यवती ने दरवाजा खोला और बाहर देखा पिताजी वहां कोई है। कौन है? मैं नहीं बता सकती। मेरा देखा हुआ नहीं है। वह कैसा दिखाई देता है? उसने सिर पर बालों का जुड़ा बांध रखा है। उसके गले में जपमाला है। हाथ में दंड और कमंडलु है। पैर में खड़ाऊ है और शरीर पर वल्कल धारण किए हुए हैं। वृद्ध है या युवा? युवा हो सकता है। उसकी दाढ़ी और मूंछ छांव में से उसकी उम्र कैसे बता सकती हूं? सत्यवती ने हंसते हुए। क...

महान प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद / पूण्य तिथि - 4 जुलाई 1902

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भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को सूर्योदय से 6 मिनट पूर्व 6 बजकर 33 मिनट 33 सेकेन्ड पर हुआ। भुवनेश्वरी देवी के विश्वविजयी पुत्र का स्वागत मंगल शंख बजाकर मंगल ध्वनी से किया गया। ऐसी महान विभूती के जन्म से भारत माता भी गौरवान्वित हुईं। नरेन्द्र की बुद्धी बचपन से ही तेज थी।बचपन में नरेन्द्र बहुत नटखट थे। भय, फटकार या धमकी का असर उन पर नहीं होता था। तो माता भुवनेश्वरी देवी ने अदभुत उपाय सोचा, नरेन्द्र का अशिष्ट आचरण जब बढ जाता तो, वो शिव शिव कह कर उनके ऊपर जल डाल देतीं। बालक नरेन्द्र एकदम शान्त हो जाते। इसमे संदेह नही की बालक नरेन्द्र शिव का ही रूप थे। माँ के मुहँ से रामायण महाभाऱत के किस्से सुनना नरेन्द्र को बहुत अच्छा लगता था।बालयावस्था में नरेन्द्र नाथ को गाङी पर घूमना बहुत पसन्द था। जब कोई पूछता बङे हो कर क्या बनोगे तो मासूमियत से कहते कोचवान बनूँगा। पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखने वाले पिता विश्वनाथ दत्त अपने पुत्र को अंग्रेजी शिक्षा देकर पाश्चातय सभ्यता में रंगना चाहते थे। किन्तु नियती ने तो कुछ खास प्रयोजन हेत...