संदेश

नवंबर 29, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्रिसमस और न्यू ईयर पर पटाखे चलाने की छूट, भारतीय त्यौहारों पर प्रतिबंध !

चित्र
दिवाली से ठीक पहले कांग्रेस शासित सरकारों की तरह दिल्ली सरकार ने दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए 9 नवंबर से 30 नवंबर तक पटाखे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिये थे। सेकुलर राजनेताओं की तरह गुलाम मानसिकता के पत्रकार, साहित्यकार भी होली, दिवाली जैसे भारतीय त्यौहारों पर पानी बचाओ, भविष्य बचाओ! प्रदुषण मुक्त भारत! जैसे कोटेशनों के बहाने अपनी दुषित बौद्धिक क्षमता का बखान करते रहते हैं। लेकिन बकरीद पर लाखों बकरों के कटने से नदियों का रंग लाल हो जाने, मुस्लिम बस्तियों में सडांध से पैदा हो रहे विषाणुओं/बिमारियों, अजान के दौरान मस्जिदों पर लाउड स्पीकर के इस्‍तेमाल से होने वाले ध्‍वनि प्रदूषण पर न्यायालयों के निर्णयों की लगातार उपेक्षा, क्रिसमस पर हजारों पेड़ काट दिये जाने से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकुल प्रभाव पर भारतीय सभ्यता/संस्कृति से घृणा करने वाली अवार्ड वापसी गैंग व एकमुश्त मुस्लिम वोटों के भूखे भेड़िये मौन धारण कर लेते हैं! कोर्ट में याचिका डालकर होली, दिवाली और दही हांडी जैसे भारतीय त्यौहारों पर अपनी खीझ निकालने वाले ईद, मुहर्रम और  क्रिसमस पर एक शब्द नहीं बोलते! पटाखों पर बैन का व...

जानिए 800 वर्ष पुराने मंदिर का रहस्य जो वैज्ञानिकों के विचार से परे है?

चित्र
आइए आज हम 800 साल पुराने मन्दिर के अनसुलझे रहस्य के बारे में जानते है जिसके रहस्य को विज्ञान भी समझ नहीं पाए है। तस्वीर स्रोत - गूगल भारत में कई मंदिर हैं जिनकी अपनी अलग विशेषता है । इन विशेषताओं के कारण , वे अपनी पहचान बनाते हैं । वैसे , आमतौर पर मंदिर का नाम उस मंदिर में देवता के नाम पर होता है । लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं , जिसका नाम इसके बिल्डर के नाम पर रखा गया है । हम बात कर रहे हैं तेलंगाना में मुलुगु जिले के वेंकटापुर डिवीजन के पालमपेट गाँव में एक घाटी में स्थित रामप्पा मंदिर की । तस्वीर स्रोत - गूगल भगवान शिव रामप्पा मंदिर में विराजमान हैं , इसलिए इसे ' रामलिंगेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है । इस मंदिर के निर्माण की कहानी बहुत ही रोचक है । ऐसा कहा जाता है कि 1213 ई । में आंध्र प्रदेश के काकतीय वंश के महापुरुष गणपति देव को अचानक शिव मंदिर बनाने का विचार आया । इसके बाद , उन्होंने अपने वास्तुकार रामप्पा को एक मंदिर बनाने का आदेश दिया , जो वर्षों तक चलेगा । तस्वीर स्रोत - गूगल रामप्पा ने अपने राजा के आदेशों का पालन किया और अपनी शिल्प कौशल ...

सद्गुरु जग्गी वासु कौन हैं?

चित्र
वामपंथी लोगों को उनसे क्या समस्या है? सदगुरु जग्गी वासुदेव एक योगी, रहस्यदर्शी और एक बुद्ध पुरुष हैं, और बुद्ध पुरुषों से बुद्धुओं को, मूढो, दुष्टों को, षडयंत्रकारियों, कुटिल लोगों को सदैव समस्या रही है। ऐसा सदा से हुआ है चाहे वो राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, जीसस, कबीर, नानक, ओशो या सदगुरु ही क्यों ना हो, इन सभी ने अपने समय में यहाँ तक की सेकड़ों, हज़ारों वर्ष बाद आज भी कुछ मूर्ख और दुर्बुद्धि लोग इन महामानवों, अवतारों, और सिद्ध पुरुषों की अवमानना और अपमान करने का दुर्भाग्यपूर्ण निंदित कृत्य करने में प्रवृत्त रहते हैं, क्या ऐसे बीमारों का कोई इलाज संभव है? चमगादड़ और अंधेरे में रहने और जीने वाले सभी जीवों को सूर्य और रोशनी से समस्या रहती है, ऐसा ही इन बंदबुद्धि वामपंथी लोगों की भी समस्या है, यह लोग भी उन्हीं में से हैं जो सत्य देखना, सुनना और प्रतिष्ठित होते देखना बर्दाश्त नहीं कर सकते, क्यूंकि, इससे इनके नीच स्वार्थों और दूषित उद्देश्य उजागर होने का भय रहता है। कुटिल और दुष्ट सत्ताधारी और राजनितिक शक्तियाँ कभी भी ऐसे लोगों और बातों को बिल्कुल पसंद और बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं, जो लोगों ...

आन्दोलनजीवी जमात का अंतिम प्रहार

चित्र
अनेक लेखकों और चिंतकों को लगता था कि और मेरा भी आंकलन था कि 2020 के जाते जाते भारत जलेगा। मुझे लगता था कि सितंबर 2020 के बाद भारत को सीमाओं पर और आंतरिक रूप से झझकोरा जाएगा। भारत में लगने वाली यह आंतरिक दवानल, चीन के लिए उस अनुकूल स्थिति का निर्माण करेगी, जिसमे भारत की सीमाओं पर आक्रमण करने का चीन का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुझे भारत चीन की सीमाओं की भौगोलिक परिस्थिति व वहां पर शीतकाल की बर्फीली दुर्गमता देखते हुए, दिसम्बर 2020 से पहले या फिर फरवरी 2021 में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण किये जाने की आशंका लगती थी। आज मुझे लगता है कि अब जब नवम्बर 2020 बीत चुका है और दिसम्बर 2020 के आते आते दिल्ली में पंजाब का किसान, किसान बिल 2020 के विरोध में आंदोलन प्रारम्भ कर चुका है, तब भारत के जलने की घड़ी भी पास आती जा रही है। मुझे सितंबर में लग रहा था कि भारत मे गृहयुद्ध स्तर के सरकार विरोधी/धार्मिक दंगे होंगे और मुझे नही लगता है कि ये आगजनी/तोड़फोड़/दंगे हिन्दू मुसलमान से शुरू होंगे। मैं आज यही सब होता देख रहा हूँ। जिस प्रकार दिल्ली में सीएए के विरोध में शाहीनबाग़ में धरना दिया गया था और फिर वहां से शेष भ...

हल्दीघाटी का सूर

चित्र
हल्दीघाटी का सूर! ......................... उस दिन प्राची की गोदी से, हँसता दिनकर निकला था, उदयांचल की ओर-छोर ने, भीषण लावा उगला था,(१) हर कोना मेवाड़ धरा का, मन ही मन था हर्षाया , केसरिया रंग उजली आभा, से पंकज था मुस्काया,(२) चहक उठे थे विहग देखकर, मृदुल रश्मियाँ दिनकर की, मानों बिन मांगे ही पूरी, अभिलाषा होती मन की,(३) महक रही थी गिरि घाटियाँ, सौरभ से भरकर सारी, रणवीरों के रक्त खेल की, थी घाटी में तैयारी,(४) समरभूमि में रणबाजा सुन, रणचंड़ी मन हर्षायी, पीने को अरिवक्ष रुधिर को, कर खप्पर ले मुस्कायी,(५) रक्त प्यास ले भैरव ने भी, सिंह नाद अट्हास किया, मुगल रक्त को चाट चाट कर, शत्रु का उपहास किया।(६) कृष्ण पखेरु नील गगन में, खुशियों से भर मड़राते, और सियार,भेड़िये,पेचक, रणभेरी सुन इतराते,(७) हल्दीघाटी की माटी से, नील गगन हो पीत उठा, रण खेलारो के पगतल से उड़ती रज छा गई घटा,(८) चमक रही वीरों की छवियाँ, वीर प्रसूता रज कण में, होड़ लगी थी वीर सुतों में, माँ को शीश समर्पण में,(९) बाँध शीश केसरिया बाना, कमरबंद्ध तलवार चढ़ा, एक हाथ में भाला बरछी, दूजे कर में ढाल मढ़ा,(१०) किसी...