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रामायण

क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे। जी हां, कांचीपुरम के 17व...

हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व

हाल ही में सोशियल मिडिया पर एक वीडियो सार्वजनिक हुआ है। जिसमे एक तेंदुआ शिकार करता है। उसका शिकार मादा जीव मरा हुआ है तभी तेंदुए की नजर उसके पेट से चिपटे बच्चे पर पड़ी। तेंदुआ चिंतित है उसके चेहरे पर पश्चाताप के भाव है। जेसे कोई भारी भूल हो गई है। तेंदुआ बच्चे को बचाने की जुगत में लगा है। उसे चाटता है। सहलाता है उठाकर सुरक्षित जगह ले जाता है। दूसरी तरफ दुनियां में फैले बरबर आतंकी है। क्रोध घृणा क्रूरता मिश्रित भाव और नजर से पंक्ति में बिठाकर इंसानो उनके बच्चो और महिलाओं का सर कलम करते वीडियो बनाकर दुनिया को वीभत्स दृश्य बता रहे है। उनके दिलो दिमाग में रत्ती भर भी दया ममता करुणा तो छोड़ो कपङे कुकृत्य पर शर्म भी नहीं। लानत है ऐसे शांतिप्रिय लोगो और उनके चाहने वालो पर।ऐसे ही हजारो दृश्य मेरी नींद उड़ा देते है। अपने भारत में ही आजादी के साथ बटवारे के दिनों में जबकि इंसानों को गाजर मुली की तरह काटा गया था, उस वक्त के दृश्य याद करके क्या आप की नींद उड़ नही जाती है ? दुनियाँ में इतना आतंक फैला है सब धर्म के नाम पर। जब हम इन बातों को उजागर करते है तब लोग हमसे उल्टा सवाल पूछते है। हालाँकि इन बात...

काव्य

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जो  नर  निराश नही  होते। जीवन में सफल वही होते। जो वृत लेते नित कर्मों का। औरों की आस नही रखते। निज पौरुष केबल वेही सदा। अमृत का पान किया करते। आओ हम भी भाग्य जगाएं। अपने भुजबल धरती तोलें। निज जीवन उज्ज्वल करें। औरों की आस विश्वास बनें। पीड़ित शोषित मानवता की। निःस्वार्थ सेवा का वृत धारें। ध्येय एक ही भारत जय हो। सतत- सजग- अडिग चलें। धुन के धनी हे  "मनमोहन"। लक्ष्य पे लक्ष्य गढते जाते।

एकात्म दर्शन

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राजस्थान में जब किसान हल जोतता है तो स्यावड़ माता का स्मरण करते हुए एक पद गाते है। इसी पद में हमारा एकात्म मानव दर्शन आ जाता है। इस भाव के जागरण के साथ ही व्यक्ति का अहम स्वयम् से उठकर परिवार,परिवार से समाज,समाज से राष्ट्र और उससे भी व्रहत होकर पूरी सृष्टि तक व्याप्त हो जाता है। स्यावड़     माता     सतकारी दाना-फाका     भोत।    करी बैण-सुभासणी रै भाग रो देई चीड़ी-कमेडी  रै  भाग रो देई ध्याणी   अर  जवाई  रो  देई घर आयो साधू  भूखो न जा बामण    दादो    धप'र   खा सुन्ना    डांगर    खा    धापै चोर-चकोर    लेज्या    आपै करुंआ    रै    भेले   ने   देई सुणीजै       माता        सूरी छत्तीस        कौमां...

108 ही क्यों???

108 की संख्या का महत्व ही क्यों जब हम माला करते है तो मन में अक्सर ये प्रश्न आता है कि माला में १०८ मनके ही क्यों होते है.इससे कम या ज्यादा क्यों नहीं ? हमारे धर्म में 108 की संख्या मह...

नव वर्ष संवत 2072

आने वाली चैत्रीय वर्ष प्रतिपदा हेतु स्वरचित :- बीत गया जो,बीत गया ! रात गई,बात गई ! बहुत कुछ अनचाहा हो गया... बहुत कुछ अनकिया रह गया ! चलो फिर से एक नई शुरूआत करें ! आने वाला है नव वर्ष ...