संघ के बारे में बनाए गए नैरेटिव को तोड़ने का प्रयास
संघ के बारे में बनाए गए नैरेटिव को तोड़ने का प्रयास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस अवसर पर संघ ने एक संगठित प्रयास शुरू किया है, ताकि उसके बारे में दशकों से गढ़े गए झूठे नैरेटिव और भ्रांतियों को दूर किया जा सके। लंबे समय से संघ पर दो प्रमुख आरोप लगाए जाते रहे हैं—पहला, कि संघ मुस्लिम विरोधी संगठन है; और दूसरा, कि स्वतंत्रता संग्राम के समय संघ ने कोई भूमिका नहीं निभाई और ब्रिटिश सरकार के साथ खड़ा रहा। संघ ने इन दोनों आरोपों को दस्तावेज़ी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर चुनौती देने का संकल्प लिया है। वास्तव में यह पहल पहली बार नहीं हुई है। सात वर्ष पूर्व 2018 में भी संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने दिल्ली में तीन दिवसीय व्याख्यानों की शृंखला में इसी उद्देश्य से संघ की विचारधारा और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला था। उस समय भी मकसद यही था कि समाज को भ्रमित करने वाले झूठे प्रचार का जवाब दिया जाए। अब शताब्दी वर्ष में इस प्रयास को और व्यापक स्वरूप दिया गया है। देश के चार प्रमुख महानगरों में तीन-तीन दिवसीय व्याख्यानों का आयोजन किया जा रहा है,...