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काल और मोक्ष का संगम: जब काशी के द्वार पहुँची उज्जैन की 'वैदिक घड़ी'

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काल और मोक्ष का संगम: जब काशी के द्वार पहुँची उज्जैन की 'वैदिक घड़ी' "कालचक्राय नमः" भारत की धरती हमेशा से ज्ञान और विज्ञान की जननी रही है। एक दौर था जब दुनिया समय को समझने की कोशिश कर रही थी, तब हमारे ऋषि-मुनि नक्षत्रों की चाल और ब्रह्मांड की लय पर अपनी दिनचर्या निर्धारित कर रहे थे। इसी गौरवशाली परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए, हाल ही में एक ऐतिहासिक घटना घटी है— विश्व की प्रथम 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' की काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापना। 1. उज्जैन और काशी: दो जीवंत नगरों का महामिलन भारतीय संस्कृति में उज्जैन को 'काल की राजधानी' (महाकाल की नगरी) माना जाता है, जहाँ से कभी दुनिया की समय गणना (Prime Meridian) शुरू होती थी। वहीं, काशी 'मोक्ष की नगरी' है, जहाँ जीवन अपने अंतिम सत्य से मिलता है। जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उज्जैन की यह 'वैदिक घड़ी' बाबा विश्वनाथ के प्रांगण में स्थापित हुई, तो यह केवल एक यंत्र की स्थापना नहीं, बल्कि काल (Time) और मोक्ष (Liberation) के बीच एक शाश्वत संवाद की शुरुआत ...