स्त्री से सीखें नेतृत्व के दो अमूल्य सूत्र : एक प्रधानाचार्य की दृष्टि से
स्त्री से सीखें नेतृत्व के दो अमूल्य सूत्र : एक प्रधानाचार्य की दृष्टि से विद्यालय केवल ज्ञान देने का स्थान नहीं होता; वह जीवन मूल्यों को समझने और आत्मविकास का केंद्र भी होता है। एक संस्था प्रधान के रूप में हमें केवल प्रशासन नहीं संभालना होता, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनना होता है। जीवन के अनेक सबक हमें पुस्तकों से मिलते हैं, लेकिन कई बार प्रकृति और समाज हमें उससे भी गहरे पाठ सिखा देते हैं। महिलाओं के जीवन को यदि ध्यान से देखा जाए तो उनमें दो ऐसे गुण दिखाई देते हैं, जो नेतृत्व, शिक्षा और जीवन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं— अनुशासन और साहस । ये दोनों गुण किसी भी शिक्षक, विद्यार्थी और शैक्षिक नेता के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। पहला सबक: अनुशासन और दिन पर नियंत्रण अक्सर यह देखा गया है कि अनेक सफल महिलाएँ अपने दिन की शुरुआत बहुत अनुशासित तरीके से करती हैं। सुबह जल्दी उठना, घर-परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना, काम की तैयारी करना और पूरे दिन को व्यवस्थित रखना—यह सब केवल आदत नहीं बल्कि आत्मनियंत्रण का प्रतीक है। नेतृत्...