संबलन का वास्तविक अर्थ: कक्षा में बदलाव, न कि केवल रिपोर्ट में आज राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सांसी बस्ती (फलोदी शहर की पिछड़ी बस्ती) में मासिक संबलन के दौरान एक ऐसा अनुभव सामने आया, जिसने स्पष्ट कर दिया कि संबलन और निरीक्षण में कितना बड़ा अंतर है। यह विद्यालय मेरे UCEEO क्षेत्र में आता है। विद्यालय में कुल नामांकन 42 छात्र है और 3 शिक्षक कार्यरत हैं। कक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति निरीक्षण के दौरान कक्षा 1, 2, 3, 4 और 5 के कुल 15 बच्चे एक साथ एक ही कक्षा में बैठे पाए गए। स्पष्ट रूप से कक्षा व्यवस्था अस्त-व्यस्त थी। यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया— मल्टी ग्रेड होना स्वयं में समस्या नहीं है, समस्या यह है कि जब 3 शिक्षक उपलब्ध हैं, तो कम से कम 3 अलग-अलग समूहों में कक्षाएं संचालित की जानी चाहिए थीं। परंतु ऐसा नहीं किया गया। यह स्पष्ट रूप से शिक्षकों के स्तर पर कार्य निष्पादन की कमी को दर्शाता है। संबलन या केवल औपचारिकता? सामान्यतः संबलनकर्ता अधिकारी शाला संबलन एप में जानकारी भरकर अपना लक्ष्य पूरा कर लेते हैं। मैं भी ऐसा कर सकता था— डेटा भरता, रिपोर्ट अपलोड करता और आगे बढ़ ज...
विकास का 'ग्रीन' कवच या सामरिक घेराबंदी? ग्रेट निकोबार का सच भूमिका अक्सर कहा जाता है कि राजनीति में जो दिखता है, वह होता नहीं और जो होता है, वह आसानी से दिखता नहीं। बंगाल के चुनावों की गहमागहमी के बीच राहुल गांधी का अचानक अंडमान की यात्रा पर निकलना और उससे पहले सोनिया गांधी का निकोबार के पर्यावरण पर भावुक लेख लिखना, केवल 'प्रकृति प्रेम' का मामला नहीं है। यह भारत की उभरती समुद्री शक्ति और वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) के उस शतरंज का हिस्सा है, जिसकी बिसात हिंद महासागर में बिछी है। 1. ग्रेट निकोबार: सिर्फ एक द्वीप नहीं, भारत का 'अनसिंकेबल एयरक्राफ्ट कैरियर' भारत सरकार का ₹75,000 करोड़ का 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' कोई साधारण कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट नहीं है। गालथेया बे में बनने वाला कंटेनर पोर्ट और INS Baaz जैसे एयरबेस का विस्तार भारत को मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) का द्वारपाल बना देगा। दुनिया का 25% व्यापार और चीन का 80% तेल आयात इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। अगर भारत यहां अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करता है, तो युद्ध या तनाव की स्थि...
नेपाल की बाढ़, हिमालय का संकट और भारत–नेपाल संबंध हिमालयी आपदा, भारत की सहायता और हिंदुत्व की सांस्कृतिक राष्ट्रदृष्टि से बदलते समीकरण प्रस्तावना : जब हिमालय ने चेतावनी दी 26 अगस्त 2026 को नेपाल–चीन सीमा के निकट हिमालय के लैंगटांग क्षेत्र में घटी एक भीषण प्राकृतिक घटना ने पूरे दक्षिण एशिया को झकझोर दिया। हिमनद और पर्वतीय चट्टान के अचानक ढहने से विशाल मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा नीचे आया और उसने नदी तंत्र को विनाशकारी बाढ़ में बदल दिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार घटना का स्रोत लैंगटांग लिरुंग के उत्तरी हिस्से में स्थित एक हिमाच्छादित पर्वतीय ढलान था। इससे उत्पन्न मलबा प्रवाह और बाढ़ लगभग 100 किलोमीटर तक नीचे पहुँची और त्रिशूली तथा भोटेकोशी नदी प्रणालियों को प्रभावित किया। घटना से उत्पन्न भूकंपीय ऊर्जा लगभग 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर थी, हालांकि यह भूकंप नहीं था। ( United States Geological Survey ) 29 अगस्त तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 669 हो चुकी थी, जबकि लगभग 2,426 लोग नेपाल में लापता बताए गए। चीन के तिब्बती क्षेत्र में भी सात मौत...
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