🕊️ अहमदाबाद विमान दुर्घटना : जब सपनों का सफर राख में बदल गया लेखक: मनमोहन पुरोहित तिथि: 13 जून 2025 ✈️ कर्णावती की दोपहर जब चुप हो गई 12 जून 2025 , दोपहर 13:40 बजे। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 , एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर , जब सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भर रही थी, तभी नियति ने अपना क्रूर प्रहार किया। प्लेन कर्णावती के मेघाणी नगर इलाके में स्थित BJ मेडिकल कॉलेज के अतुल्य हॉस्टल के पीछे , सिविल अस्पताल के निकट क्रैश हो गया। 🔥 मौत की विभीषिका: तबाही की सूची यात्रियों की संख्या: 242 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली, 1 केनेडियन, 12 क्रू मृत्यु: लगभग 300 घायल: 60+ 📍 नुकसान का ब्यौरा: अतुल्य हॉस्टल पूरी तरह जर्जर सैकड़ों वाहन जलकर राख पोस्टमार्टम हॉल क्षमता से अधिक शवों से भर गया सिविल अस्पताल के तीन केंद्रों में काम जारी: ट्रॉमा सेंटर पोस्टमार्टम यूनिट ओल्ड ट्रॉमा यूनिट 🧑🤝🧑 जब मानवता ने संभाला मोर्चा: स्वयंसेवकों की सेवा जब हर तरफ च...
आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी संकल्प और वैश्विक चुनौतियों का जवाब "देश उठेगा अपने पैरों निज गौरव के भान से। स्नेह भरा विश्वास जगाकर जीयें सुख सम्मान से।।" — नंदलाल 'बाबा जी' भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहाँ चुनौतियाँ भी हैं और अवसर भी। ट्रंप प्रशासन के 60% आयात शुल्क और H1B1 वीज़ा प्रतिबंधों जैसी वैश्विक परिस्थितियों ने भारत को झकझोरा, लेकिन यह झटका भारत के लिए आत्मविश्वास की नई यात्रा की शुरुआत बना। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और इसके सहायक मिशन—मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI)—ने इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया। यह कहानी केवल योजनाओं और आंकड़ों की नहीं, बल्कि उस स्वदेशी गौरव की है, जो हमें अपने पैरों पर खड़ा होना और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ना सिखाती है। स्वदेशी गौरव की नींव बाबा जी के इसी गीत की पंक्ति कितनी सत्य है। “परावलम्बी देश जगत में, कभी न यश पा सकता है” यह आत्मनिर्भर भारत का सार है। 2020 में कोविड संकट के बीच इस अभियान की शुरुआत हुई और इसका लक्ष्य आर्थिक, तकनीकी और स...
कैसे सोशल मीडिया का ग्लैमर बन सकता है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा 🔍 परिचय: एक चुलबुली इन्फ्लुएंसर से कथित जासूस तक का सफर हरियाणा की रहने वाली ट्रैवल व्लॉगर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी ने भारत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की दुनिया की परतें खोल दी हैं। "चुलबुली ज्योति" या "जी" नाम से प्रसिद्ध यह यूट्यूबर, एक स्वतंत्र जीवनशैली और यात्राओं की कहानियों से दर्शकों को जोड़ती थी। लेकिन उसके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने के आरोप न केवल सुरक्षा प्रतिष्ठानों को झकझोरते हैं, बल्कि यह भी उजागर करते हैं कि डिजिटल युग में जासूसी अब केवल फिल्मों का विषय नहीं रह गया है। 🌐 डिजिटल प्लेटफॉर्म: आत्म-अभिव्यक्ति या साजिश का औजार? ज्योति मल्होत्रा यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी यात्राओं की कहानियाँ साझा करती थी। पाकिस्तान की यात्राओं और "संस्कृति विनिमय" के नाम पर बनाए गए वीडियो एक सामान्य ट्रैवल व्लॉग लगते हैं। परन्तु सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग जासूसी और...
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