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असम से बंगाल तक: पूर्वोत्तर में बदलता राजनीतिक भूगोल और नेतृत्व का प्रभाव

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असम से बंगाल तक: पूर्वोत्तर में बदलता राजनीतिक भूगोल और नेतृत्व का प्रभाव बंगाल की चर्चा करते समय यदि असम को भूल जाएँ, तो यह विश्लेषण अधूरा रह जाएगा। क्योंकि पूर्वोत्तर भारत में जो राजनीतिक परिवर्तन आज दिखाई दे रहा है, उसकी शुरुआत असम से ही हुई थी—और यह परिवर्तन किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति और मजबूत नेतृत्व का परिणाम है। जहाँ शून्य था, वहाँ शिखर कैसे बना? एक समय था जब असम और पूरा पूर्वोत्तर भारतीय जनता पार्टी के लिए लगभग “अछूता क्षेत्र” माना जाता था। राजनीतिक प्रभाव नगण्य था, संगठन सीमित था और स्थानीय समीकरण पूरी तरह अन्य दलों के पक्ष में थे। लेकिन 2016 में परिदृश्य बदला। सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में पहली बार भाजपा ने असम में सरकार बनाई। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था—यह उस सोच की शुरुआत थी, जिसमें पूर्वोत्तर को मुख्यधारा की राजनीति और विकास से जोड़ने का लक्ष्य स्पष्ट था। रणनीतिक दांव: हिमंत बिस्वा सरमा का आगमन राजनीति में कुछ फैसले तत्काल समझ नहीं आते, लेकिन समय उन्हें सही साबित करता है। हिमंत बिस्वा सरमा का भाजपा में आना ऐसा ही एक नि...

ममता का मिथक टूटा, मुखर्जी का मंत्र लौटा

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ममता का मिथक टूटा, मुखर्जी का मंत्र लौटा: अब केसरिया चेतना का बंगाल पश्चिम बंगाल ने अंततः वह कर दिखाया, जिसका इंतजार वर्षों से था। यह केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि इतिहास की पुनरावृत्ति है—एक ऐसा निर्णायक क्षण, जहाँ तुष्टिकरण, भय और राजनीतिक गुंडागर्दी की जकड़न को जनता ने अपने मत की चोट से तोड़ दिया। ममता बनर्जी का तथाकथित अभेद्य किला ध्वस्त हो चुका है। वह सत्ता, जो खुद को अजेय समझ बैठी थी, आज जनमत के प्रचंड वेग में बह गई। वर्षों तक “अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” को शासन का आधार बनाने वाली राजनीति को जनता ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—लोकतंत्र में तुष्टिकरण नहीं, संतुलन और न्याय चलता है। यह जनादेश: आक्रोश का विस्फोट है यह परिणाम अचानक नहीं आया। इसके पीछे वर्षों का संचित आक्रोश है— सैंड माफिया कोल माफिया लैंड माफिया घुसपैठ और कैटल माफिया इन सबके संरक्षण में पनपती व्यवस्था ने आम बंगाली के जीवन को जकड़ लिया था। प्रशासन पंगु था, कानून व्यवस्था पक्षपाती थी और आम नागरिक भय के साये में जीने को विवश था। लेकिन इस बार जनता ने डर को दरवाजे पर ही छोड़ दिया। केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने...