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युवाओं के भविष्य पर संकट: परीक्षा प्रणाली में सेंध और बदलती सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ

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  भूमिका राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के हालिया घटनाक्रमों ने देश के करोड़ों युवाओं, अभिभावकों और पूरी शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा की शुचिता केवल एक प्रशासनिक शब्द नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक अनुबंध की आधारशिला है जो एक आम परिवार के प्रतिभावान बच्चे को अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का भरोसा देती है। जब इस व्यवस्था में सेंध लगती है, तो केवल एक प्रश्नपत्र लीक नहीं होता, बल्कि देश के भविष्य का भरोसा लीक होता है। अब समय आ गया है कि हम इस समस्या के सतही प्रशासनिक कारणों से आगे बढ़कर इसके मूल कारणों, बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और इसके स्थाई समाधानों पर गहन विचार करें।  "प्रतियोगी परीक्षा और युवाओं का भविष्य"    समस्या का संकेत और वर्तमान संकट का मूल अखबारों की सुर्खियां और हालिया गिरफ्तारियां साफ संकेत देती हैं कि परीक्षा संचालन का मौजूदा ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। इस संकट के मूल में निम्नलिखित कारण दिखाई देते हैं:   निजीकरण, भौगोलिक दूरी और विश्वसन...