इतिहास से सीख और वर्तमान की तैयारी: हजार वर्षों की पराधीनता से विकसित भारत तक
इतिहास से सीख और वर्तमान की तैयारी हजार वर्षों की पराधीनता से विकसित भारत तक की यात्रा ✍️ मनमोहन पुरोहित 'मनु महाराज' राष्ट्रों का जीवन भी मनुष्य की भाँति होता है। जो अपने अतीत से सीखते हैं, वे भविष्य का निर्माण करते हैं और जो इतिहास को केवल स्मृतियों का संग्रह समझते हैं, वे बार-बार वही भूलें दोहराने को अभिशप्त होते हैं। भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसके सामने अवसर भी है और उत्तरदायित्व भी। विश्व की बदलती परिस्थितियाँ भारत को नेतृत्व की भूमिका में देखने लगी हैं, लेकिन इतिहास हमें सावधान भी करता है कि अवसर तभी उपलब्धि बनते हैं जब उनके अनुरूप तैयारी भी हो। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात कही— "हमने हजार वर्ष गुलामी झेली। जिन्होंने हमें गुलाम बनाया, वे हमसे श्रेष्ठ नहीं थे। हमने अपनी तैयारी को खो दिया था। उस तैयारी को हमें पुनः करना पड़ेगा।" यह कथन केवल इतिहास की व्याख्या नहीं, बल्कि वर्तमान भारत के लिए दिशा-सूत्र है। क्या वास्तव में हम कमजोर थे? यह...